
हल्का होकर उड़े गगन में
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हल्का होकर उड़े गगन में ख़ुदबुद करती रही चेतना धक-धक करता रहा हृदय
यह,उठतीं-गिरती रहतीं लहरें लिप्सा कभी, कभी छाया भय !कितनी चट्टानें थीं
भारी रस्तों में प...
7 घंटे पहले
डाॅं साधना बलवटे
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सही राह पर चलकर ही खुशियां मिलती हैं बहुत सुन्दर
उत्कृष्ट प्रस्तुति
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