जवानी पर चढ़ गयी है सर्दियां
रात की ठिठुरन से बचने, भूल सब शिकवे ,गिले
शाम ,डर कर,उलटे पैरों,दोपहर से जा मिले
ओढ़ ले कोहरे की चादर ,धूप ,तज अपनी अकड़
छटपटाये चमकने को ,सूर्य पीला जाये पड़
हवायें जब कंपकंपाये ,निकलना मुश्किल करे
चूमने को चाय प्याला ,बारहां जब दिल करे
जेब से ना हाथ निकले ,दिखाये कन्जूसियाँ
पास में बैठे रहे बस ,लगे मन भाने पिया
लिपट तन से जब रजाई ,दिखाये हमदर्दियाँ
तो समझ लो ,जवानी पर,चढ़ गयी है सर्दियाँ
घोटू
कोरकोट्टी
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*कोरकोट्टी*
*सब* कुछ भूल सकता हूँ पर ये नाम नहीं भूल सकता कभी।
*अविभाजित* राजनांदगाँव में घटित ऐसी कोई नक्सल घटना नहीं, जिसके होने के बाद
वहाँ न पहुंचा ह...
11 घंटे पहले





