पते की बात
माँ का त्याग
घर में पांच लोग होते थे,,
पर जब चार सेव आते
तब माँ ही होती जो कहती ,
मुझे सेव फल ना भाते
घोटू
भुला दिया है
-
भुला दिया है देह एक नाव है मुझ नदी में तैरती हुई जो अनंत काल से, अनंत देश
के पार बह रही है मैं नाव नहीं हूँ, नदी हूँ, पर यह भुला दिया है ! देह एक
घर है म...
1 दिन पहले
माँ तो ऐसी ही होती हैं ,दिल छू लेने वाली रचना
जवाब देंहटाएं