ये प्यारा इन्कार तुम्हारा
पहले तो ये सजना धजना ,
मुझे लुभाना और रिझाना
बाँहों में लूं ,छोडो छोडो ,
कह कर मुझसे लिपटे जाना
ये प्यारा इन्कार तुम्हारा ,
रूठ रूठ कर के मन जाना
वो प्यारी सी मान मनोवल ,
आकर पास ,छिटक फिर जाना
इन्ही अदाओं का जादू तो,
मन की तड़फ ,आग भड़काता
अगर ना नुकर तुम ना करती ,
कैसे मज़ा प्यार का आता
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
किसी दिन....
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1. *जो कभी भूल जाऊँ मैं-*
भूलते - भूलते
अगर कभी तुम्हें भूल जाऊँ मैं
उस समय को उस पल को दोष नहीं देना
जब पहली बार मिले थे हम तुम!
चाय के उन दो कपों ...
1 दिन पहले
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