बेचारी मधुमख्खी
निखारना हो अपना रूप
या दिल को करना हो मजबूत
मोटापा घटाना हो
खांसी से निजात पाना हो
चेहरा हो बहुत सुन्दर ,इसलिए
नहीं हो ,हाई ब्लड प्रेशर ,इसलिए
हम शहद काम में लाते है
पर कृषि वैज्ञानिक बताते है
शहद का बनाना नहीं है सहज
और एक मधुमख्खी ,अपने जीवनकाल में,
पैदा करती ही कुल आधा चम्मच शहद
मधुमाख्खियाँ,फूलों के ,
करीब दो करोड़ चक्कर लगाती है
तब कहीं ,आधा किलो शहद बन पाती है
मधुमख्खियों के ,पांच आँख होती है
वो,कभी भी नहीं सोती है
मधुमाख्खियों को लाल रंग,
काला दिखता है
इसलिए लाल फूलों का ,
शहद नहीं बनता है
फिर भी ,लगी रहती है दिन रात ,
पूरी लगन के साथ
कभी भी ना थकी
बेचारी मधुमख्खी
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
सत्तरवाँ साल
-
*पहले उतरी बालों में चाँदी *
*और फिर उखड़े दो-चार दाँत *
*दुख-सुख की आड़ी-तिरछी सी ,*
*चेहरे पे उतरीं लकीरें तमाम *
*हथेलियों पर उभरीं नीली-नीली नसे...
49 मिनट पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।