पते की बात
विध्वंस और निर्माण
बीज उगता तो नहीं,करता वो कुछ आवाज है
मगर गिरता पेड़ ,लगता ,गिरी कोई गाज है
शोरगुल विध्वंस करता ,शांति है निर्माण में
बस यही तो फर्क है ,विध्वंस और निर्माण में
घोटू
तेरा-मेरा भेद हुआ कब
-
तेरा-मेरा भेद हुआ कब तू सिंधु, मैं बूँद हूँ तेरी तू सूरज मैं किरण
सुनहरी, तू संपूर्ण समष्टि, मैं व्यष्टि तू बोध विशुद्ध हूँ मैं दृष्टि ! तू
व्यापक, मैं तेर...
22 घंटे पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।