पते की बात
विध्वंस और निर्माण
बीज उगता तो नहीं,करता वो कुछ आवाज है
मगर गिरता पेड़ ,लगता ,गिरी कोई गाज है
शोरगुल विध्वंस करता ,शांति है निर्माण में
बस यही तो फर्क है ,विध्वंस और निर्माण में
घोटू
सत्तरवाँ साल
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*पहले उतरी बालों में चाँदी *
*और फिर उखड़े दो-चार दाँत *
*दुख-सुख की आड़ी-तिरछी सी ,*
*चेहरे पे उतरीं लकीरें तमाम *
*हथेलियों पर उभरीं नीली-नीली नसे...
49 मिनट पहले
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