पते की बात
अचरज
नहीं खबर है अगले पल की
पर डूबे , चिंता में,कल की
भाग दौड़ कर ,कमा रहे है
यूं ही जीवन ,गमा रहे है
जब कि पता ना,कल क्या होगा
इससे बढ़,अचरज क्या होगा
घोटू
सरस्वती वंदना
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सरस्वती वंदना
विद्या की देवी हे श्वेतवर्णा ।
सबके हृदय में प्रवेश करना
आखर की माला तुमने सजाई
पन्नों पर उसको लेकर उतरना
विद्या की देवी हे श्वेतवर्णा...
16 घंटे पहले
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