पते की बात
अचरज
नहीं खबर है अगले पल की
पर डूबे , चिंता में,कल की
भाग दौड़ कर ,कमा रहे है
यूं ही जीवन ,गमा रहे है
जब कि पता ना,कल क्या होगा
इससे बढ़,अचरज क्या होगा
घोटू
1519-कन्हैया
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*1- ओ कन्हैया **/**डॉ. **कनक लता मिश्रा*
*ले लो अपनी शरण में कन्हैया*
*रखलो हमको भी पलको की छइ**याँ*
*ओ कन्हैया…*
*सौप दिए अपने सब रंग तुमको*
*...
3 घंटे पहले
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