मंथरा
जो लोग अपना भला बुरा नहीं समझते
आँख मूँद कर, दूसरों की सलाह पर है चलते
उन पर मुसीबत आती ही आती है
बुद्धि भ्रष्ट करने के लिए ,हर केकैयी को ,
कोई ना कोई मंथरा मिल ही जाती है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग सात (07)
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ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग सात (07)भाग 7 प्रियंका "श्रेया कैसी है?" ईशानी
ने फोन पर पूछा, जब मैं मेहमानों के सो जाने के बाद सुबह के लिए आटा गूंथ रही
थी। ...
4 घंटे पहले
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