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बुधवार, 30 दिसंबर 2020

२०२० का साल

कितनो की बज गयी ढपलियाँ,नहीं रहा सुरताल
कितने ही बीमार हो गए ,कई हुए बदहाल
दुनिया को आतंकित करने ,चली चीन ने चाल
सबके मन में टीस दे गया ,बीस बीस का साल

कोरोना ने कहर मचाया ,पड़े कई बीमार
शहर शहर तालाबंदी थी ,बन्द हुआ व्यापार
लोगों ने दूरियां बनाली ,मुंह पर पट्टी डाल
सबके मन में टीस दे गया ,बीस बीस का साल

बंद फैक्टरी ,कामकाज सब ,लोग हुए बेकार
किया गाँव की ओर पलायन ,होकर के लाचार
मीलों पैदल चले बिचारे ,परेशान ,बदहाल
सबके मन में टीस  दे गया ,बीस बीस का साल

बंद होगये मंदिर ,मस्जिद ,सभी धर्म स्थान  
कोरोना डर ,गर्भगृहों में, छुप बैठे भगवान
अस्तव्यस्त सब ,चली वक़्त ने ऐसी उलटीचाल
सबके मन में टीस दे गया ,बीसबीस का साल

अब आया इक्कीस करेगा,हम सबका उपचार
आशा है सबको 'किस 'देकर ,फैलाएगा प्यार
यही प्रार्थना है ईश्वर से ,सभी रहे खुशहाल
सबके मन में टीस दे गया ,बीसबीस का साल

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 

रविवार, 27 दिसंबर 2020

बेचारे गरीब किसान

बेचारे गरीब किसान
अपना सब सामान
ट्रालियों में लाद  कर लाये  है
दिल्ली में आंदोलन करने आये है
उनके तथाकथित शुभचिंतक नेता ,
उन्हें भटकाने में लगे है
अपनी लूटी हुई नेतागिरी की दूकान ,
फिर से चमकाने में लगे है
इन्ही की बातों से  बरगलाये ,
बिचारे किसान जिद पर अड़े है
सर्दी में सड़कों पर खुल्ले में पड़े है
कोई इन्हे सब सुविधा मुहैया करवा रहा है
सर्दी है तो कम्बल बंटवा रहा है
काजू किशमिश लूट रही है
बादाम घुट रही है
लड्डू है ,जलेबियाँ है
दिन भर चाय की चुस्कियां है
खाने के लिए लंगर चल रहे है
मशीनों में कपडे धुल  रहे है
पैर दबाने के लिये मशीने मंगाई है
फ्री में हजामत बनाता नाइ है
मशीनों से रोटियां बन रही है
अच्छी मस्ती छन रही है
क्योंकि सब सुविधाएँ मुफ्त है
बस सर्दी का कुफ्त है
अलाव के लिए लकड़ियों का इंतजाम है
हर तरह का  आराम है
इसलिये जल्दी नहीं ,हटने में देर है
क्योंकि अभी फसल कटने में देर है
नेताजी कहते है क़ानून काले है
जब तक वापस नहीं होते,
 हम नहीं जानेवाले है
हम नेताजी की बात मानते है
काला क्या है ,नहीं जानते है
बस थोड़ी सी नारेबाजी कर लेते है
दिन भर मौजमस्ती से पेट भर लेते है
कौन  क्यों कर रहा है ये सारे इंतजाम
इस बात से अनजान
बेचारे किसान
ये नहीं  जानते कि उनके नेताओं के
मापदंड दोहरे है
वो तो इस राजनीति के खेल के ,
सिर्फ मोहरे है
रोज रोज ये जो इतनी हलचल दिख रही है
कई भूले बिसरे नेताओं की
राजनैतिक रोटियां सिक रही है
फिर भी इनकी बातें मान
सर्दी में परेशान
बेचारे गरीब किसान

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
नीला आसमान खो गया

नीला आसमान खो गया
उगलती काला धुंवां है ,फैक्टरी की चिमनियां
कार,ट्रक ,डीज़ल ,प्रदूषित कर रहे सारी हवा
खेत में जलती पराली
पटाखों वाली दिवाली
नीला आसमान खो गया

वृक्ष ,जंगल कट रहे है बन रहे नूतन भवन
बिगड़ता जाता दिनोदिन ,प्रकृति का संतुलन
सांस लेने में घुटन है
बहुत ज्यादा प्रदूषण है
नीला आसमान खो गया

सरदियों  में धुंध कोहरा,गरमियों में आंधियां
बनी दूरी चाँद तारों और  इंसान  ,दरमियां
टिमटिमाते थे जो तारे
नज़र आते नहीं  सारे
नीला आसमान खो गया

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

बुढ़ापा और प्यार

तेरे गेसू भले ही अब गजब नहीं ढाते ,
श्वेत है ,सादगी है ,साधुओं से रहते है
नयन तेरे नहीं अब तीर चला पाते है ,
मोतियाबिंद से ढक ,बुझे बुझे रहते है
गुलाबी गाल का भी हाल बड़ा खस्ता है
लरजते होंठ हंसी हँसते है ,फीकी ,सादी
कसाव जिस्म का ,जाता है दिनबदिन ढलता
उफनता जिस्म भी अब रहा नहीं उन्मादी
न रही वो पुरानी शोखियाँ और वो जलवे ,
न बची जिस्म में  बाकी  वो पुरानी गरमी
न अदाओं में  ही बचा  है  वो पुराना जादू ,
नहीं बातों में बेतकल्लुफी और बेशरमी
मगर फिर भी न जाने क्यों ये हुआ जाता है ,
दिनों दिन बढ़ती ही जाती है मोहब्बत अपनी
तू मेरे साथ है और पास है ये क्या कम है ,
खुदा के ख़ैर से जोड़ी है सलामत  अपनी
मोहब्बत तन की ना बस मन की हुआ करती है ,
ये ही अहसास उमर ढलती है ,तब  होता है
 प्यार तो रहता है कायम सदा मरते दम तक,
करना पड़ता मगर हालात से समझौता  है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

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