चिक
मेरे शयनकक्ष में,रोज धूप आती थी
सर्दी में सुहाती थी
गर्मी में सताती थी
अब मैंने एक चिक लगवाली है
और धूप से मनचाही निज़ात पा ली है
समय के अनुरूप
वासना की धूप
जब मेरे संयम की चिक की दीवार से टकराती है
कभी हार जाती है
कभी जीत जाती है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
रजिस्टर्ड एडवोकेट को ही वकालत का अधिकार - इलाहाबाद हाइकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि
*कोई भी व्यक्ति, भले ही उसके पास पावर ऑफ़ अटॉर्नी हो, एडवोकेट्स एक्ट, 1961
के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए म...
9 घंटे पहले