ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग अट्ठाईस (28)
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ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग अट्ठाईस (28)भाग 28 अंशुमन श्रेया दीपावली के
दिन बरामदे में बैठना चाहती थी। मौसम साफ और ठंडा था। सूरज चमक रहा था, आसमान
नीला था...
13 घंटे पहले

सुन्दर प्रस्तुति.
जवाब देंहटाएंआँखों का भी अदभुत फसाना है.
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.
बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।
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