ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग अट्ठाईस (28)
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ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग अट्ठाईस (28)भाग 28 अंशुमन श्रेया दीपावली के
दिन बरामदे में बैठना चाहती थी। मौसम साफ और ठंडा था। सूरज चमक रहा था, आसमान
नीला था...
14 घंटे पहले
Wah! aap to bahumukhi pratibha ke dhani hain!! ..
जवाब देंहटाएंवाह ..बहुत खूब
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