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शनिवार, 26 जुलाई 2014

संवाद -रेल की पटरियों का

     संवाद -रेल की पटरियों का

उधर तुम अकेली,इधर मैं अकेली,
             पडी हम ,यूं ही जंग है लगती जाती
अगर जिंदगी का ,लड़े जंग हम तुम,
             मिले एक से एक,ग्यारह कहाती
संग संग रहे पर ,उचित दूरियां हो ,
               पकड़ हो जमीं से,बहुत काम आती
तभी रेल की पटरियां बन के बिछती,
               कई ट्रेन हम पर,तभी दौड़  पाती

घोटू

मैं हूँ भारत की आजादी

              मैं हूँ भारत की आजादी

उमर हो गयी है सड़सठ की ,अब भी किन्तु,अधूरी,आधी
                                          मैं हूँ  भारत की आजादी
आयी थी मैं स्वप्न सजा कर,सुन्दर ,खुशहाली जीवन के
हो  बरबाद  ,रह गयी हूँ मैं , केवल एक तमाशा बन के
समझौतों की राजनीति ने, जिससे सत्ता में टिक पाओ
ऐसी बंदर बांट मचाई,  हम भी खाएं,तुम भी खाओ
सबने मुझको ,लूटा जी भर,किसे बताऊँ ,मैं अपराधी
                                       मैं हूँ भारत की आजादी
अब भी  मुझको ,छेड़ा करते ,हैं शैतान ,पड़ोसी लड़के
कई बार पीटा है उनको ,और छकाया आगे   बढ़  के
लेकिन उनकी ,बुरी नज़र है ,लगी हुई है,अब भी मुझ पर
कई रहनुमा ,आये बदले,कोई नहीं ,पाया कुछ भी कर
सबने अपने , मतलब साधे ,और हुई मेरी   बरबादी
                                      मैं  हूँ भारत की आजादी
अवमूल्यन हो रहा दिनोदिन,लोग मुफ्त का चन्दन घिसते
और जनता के लोग बिचारे,मंहगाई के मारे    पिसते
 चुरा चुरा कर ,मेरे गहने,स्विस बैंकों में जमा कर दिये 
मेरे ही संरक्षक बन कर,मेरे तन पर घाव   भर दिये                                         
क्षत विक्षत कर,अर्थव्यवस्था सबने खूब कमाई चांदी
                                            मैं हूँ भारत की आजादी
बहुत  दिनों के बाद भाग्य ने,मेरे अब एक करवट ली है
जनता ने अबके चुनाव में ,मेरी कुछ किस्मत बदली है
बहुत दिनों से छाये थे जो बादल छट  जाने वाले है
मेरे मन में आस लगी है ,अच्छे दिन आने वाले है
देखें लालकिले से अबके ,मोदी करते ,कौन मुनादी
                                   मैं हूँ भारत की आजादी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
                                      

छप्पर

          छप्पर
कहते है,जब खुदा देता,देता छप्पर फाड़ के,
दिया हमको भी खुदा ने ,मगर उलटा हो गया
फटा छप्पर,धूप,बारिश की मुसीबत आगयी ,
रिपेयर छप्पर कराया ,खर्चा  दूना  हो गया
एक हसीना नाज़नीं ,बीबी हमारी जब बनी,
हम थे खुश कि खुदा हम पर है मेहरबां हो गया
शुरू जब फरमाइशों का ,सिलसिला उनका हुआ,
क्या बताएं,मुफलिसी में ,आटा गीला हो गया 
घोटू

बुधवार, 23 जुलाई 2014

भविष्यवाणी

           भविष्यवाणी

 सभी चैनल पर है  पंडित जी कोई ना कोई ,आते
देख कर के चाल ग्रह की,सभी को है ,ये   बताते
आज दिन बीतेगा कैसे ,आपका भविष्य क्या है
एक दिन की बात ना है ,रोज का ये सिलसिला है
सिर्फ बारह राशियों में ,समय का है खेल चलता
'मेष' के घर क्लेश होगा,'कुम्भ'पायेगा सफलता
'मिथुन'वाले सुखी होंगे,मान कर पत्नी की बातें
'मीन'का है चन्द्र दुर्बल,रहें शिव पर जल चढ़ाते
'कर्क'पर शनि वक्र है ,हनुमानजी का करें पूजन
'बन रहा धन योग 'धनु' अचानक ही आएगा धन
और 'वृश्चिक',रहे निश्चित,शीध्र उनके दिन फिरेंगे
एक नरियल,बहते जल में,वो अगर जो बहा देंगे
संभल करके  रहे'कन्या'राशि,दुर्घटना घटेगी
और 'मकर'वालों सभी की,आज तो चांदी कटेगी
'सिंह' वाले ,क्रोध पर जो ,रखें काबू तो भला है
 मिला जुला रहेगा दिन, जिन्होंकी राशि 'तुला' है
और सब 'वृष'राशि वाले,भावना को रखे वश में
प्रभु का स्मरण करेंगे,वृद्धि होगी ,किर्ती,यश में
पास में आचार्य जी के ,हर एक विपदा की दवा है
जान ही अब गए होंगे , आपका भविष्य  क्या है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

इन्तजार

           इन्तजार
थे बच्चे भूख जब लगती ,हम रोते और मचलते थे,
  दूध अम्मा पिलाएगी ,यही इन्तजार करते थे
बड़े होकर गए स्कूल,न मन लगता पढाई में ,
बजे कब छुट्टी की घंटी,यही इन्तजार करते थे
मोहब्बत की जवानी में,किसी के प्यार में डूबे,
हमेशा माशुका से मिलन का, इन्तजार करते थे
गृहस्थी का पड़ा जब बोझ,तो फिर मुश्किलें आई,
कभी आएंगे अच्छे दिन,यही इन्तजार करते थे
रहा इन्तजार जीवन भर,कभी इसका,कभी उसका ,
सिलसिला अब बुढ़ापे में ,भी वो का वो ही जारी है
जिंदगी के सफर का अब,अंत नजदीक आने को ,
न जाने मौत  कब आये,उसी की  इंतजारी है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

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