क्या क्या खिलाती है?
न पूछो आप हमसे औरतें क्या क्या खिलाती है
ये खुद गुल है,मगर फिर भी,हजारों गुल खिलाती है
हसीं हैं,चाँद सा चेहरा,ये मेक अप कर खिलाती है
अदा से जब ये चलती है,कमर को बल खिलाती है
ख़ुशी में,प्यार में,जब झूम के ये खिलखिलाती है
चमक आँखों में आ जाती,हमारे दिल खिलाती है
करो शादी अगर तो सात ये फेरे खिलाती है
किसी वीरान घर को भी ,चमन सा ये खिलाती है
पका कर दो वख्त ,ये मर्द को ,खाना खिलाती है
जो बच्चे तंग करते,उनको ,रोज़ाना खिलाती है
कभी गुस्सा खिलाती है,कभी धमकी खिलाती है
जरा सी बात ना मानो,तो बेलन की खिलाती है
कभी होली खिलाती है,कभी गोली खिलाती है
ये कडवे डोज़ भी हमको,बनी भोली खिलाती है
जरा से प्यार के खातिर,कई चक्कर खिलाती है
कभी जूते खिलाती है,कभी चप्पल खिलाती है
हवा ये अच्छे अच्छों को,हवालात की खिलाती है
खुदा! ये खेलती है हमसे या हमको खिलाती है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
हत्यारोपी परिवार का सदस्य अनुकम्पा नियुक्ति से वंचित नहीं - सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि
*यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार के किसी सदस्य पर हत्या का आरोप है,
तो उसे मिलने व...
1 दिन पहले
बहुत खूब !!!!!!
जवाब देंहटाएंdhanywad
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