तुमने जो सहला दिया है
तुमने जो सहला दिया है
मन मेरा बहला दिया है
जरा से ही इशारे में,
बहुत कुछ कहला दिया है
तुम्हारी प्यारी छुवन ने
लगा दी है आग तन में
एक नशा सा छागया है
और मन पगला गया है
जब तुम्हारी सांस महके
जब तुम्हारे होंठ दहके
तुम्हारी कातिल अदायें
तरंगें मन में जगायें
कामनाएं बलवती है
सांस की दूनी गति है
घुमड़ कर घन छा गए है
ह्रदय को तडफा गए है
तुम्हे अब क्या बताएं हम
बड़ा ही बेचैन है मन
अगर बारिश आएगी ना
प्यास ये बुझ पायेगी ना
तुम्हारी इन शोखियों ने,
ह्रदय को दहला दिया है
तुमने जो सहला दिया है
मन मेरा बहला दिया है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
प्रेम रहेगा कैसे मन में
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प्रेम रहेगा कैसे मन मेंजब ना कोई घर में रहता तब चुपके से कान्हा आता, नवनीत
चुरा मटका तोड़े गोपी का हर दुख मिट जाता !द्वार खुला ही छोड़ गई थी निशदिन
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9 घंटे पहले
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