आम -आदमी
बचपन हो या जवानी,
कच्चे आम की तरह होती है,
चटपटी,खट्टी मीठी,
चटकारे ले ले कर खालो
चटनी,अचार,मुरब्बा या पना,
जो चाहो,बना लो
पर जब अनुभवों की ऊष्मा से,
उनमे पकाव आता है
तो निराली सी स्वर्णिम आभा से,
उनका रूप महक जाता है
और वो बन जाते है आम,
स्वादिष्ट, सुगन्धित,रस भरे,
जिनकी हर घूँट में मिठास होता है
खाओ या चूंसो,
संतुष्टि का आभास होता है
जीवन के इस अंतिम चरण में भी,
गजब का स्वाद होता है
रस तो रस,गुठलियों का भी दाम होता है
हर आम आदमी का जीवन,
आम होता है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
वासंतिक नवरात्र आ गये
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वासंतिक नवरात्र आ गये माँ के आने की बेला है घर में मंगल कलश बिठाओ,धूप-दीप,
फूलों से स्वागत द्वारे बंदनवार सजाओ ! माँ जो भीतर कण-कण में हैं गहरी अंतर
प्या...
4 घंटे पहले
वाह ..क्या उदाहरण देकर जीवन का सार समझाया हैं आपने ....आभार
जवाब देंहटाएंजीवन को नए नजरिये से देखने का अंदाज प्यारा है ,बधाई.
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