इतना ही काफी है
बच्चे ,अब बढे हो गये है
अपने पैरों पर खड़े हो गये है
ख़ुशी है ,कुछ बन गये है
गर्व से पर तन गये है
कभी कभी जब मिलते
लोकलाज या दिल से
चरण छुवा करते है
कमर झुका लेते है
ये भी क्या कुछ कम है
खुश हो जाते हम है
नम्रता कुछ बाकी है
इतना ही काफी है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
वासंतिक नवरात्र आ गये
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वासंतिक नवरात्र आ गये माँ के आने की बेला है घर में मंगल कलश बिठाओ,धूप-दीप,
फूलों से स्वागत द्वारे बंदनवार सजाओ ! माँ जो भीतर कण-कण में हैं गहरी अंतर
प्या...
2 घंटे पहले
सटीक पंक्तियाँ - इतना ही काफी है समझाने को, मन को.
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