कल के लिये
आस है कल अगर फल की ,आज पौधे रोंपने है
विरासत के वजीफे,नव पीढ़ियों को सौंपने है
मार कर के कुंडली ,कब तलक बैठे तुम रहोगे
सभी सत्ता ,सम्पदा,सुख को समेटे तुम रहोगे
थक गये हो,पक गये हो,हो गये बेहाल से तुम
टपक सकते हो कभी भी,टूट करके डाल से तुम
छोड़ दो ये सभी बंधन, मोह, माया में भटकना
एक दिन तस्वीर बन,दीवार पर तुमको लटकना
वानप्रस्थी इस उमर में,भूल जाओ कामनायें
प्यार सब जी भर लुटा दो,बाँट दो सदभावनाएँ
याद रख्खे पीढियां,कुछ काम एसा कर दिखाओ
कमाई कर ली बहुत , अब नाम तुम अपना कमाओ
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
सांख्य का तत्त्व ज्ञान
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सांख्य दर्शन मीमांसा
सांख्य दर्शन में लिंग - अलिंग तत्त्व ⤵️
लिंग अर्थात जिनकी पहचान संभव हो और जिनका लय होता हो , जो समयाधीन हों। अलिंग
, जो सनातन है...
23 घंटे पहले
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