नाम पर मत जाओ
सूर है सूरज में,सूर याने चक्षु हीन,
सबको पथ दिखलाता,जग मग कर के जगती
सूरज में रज भी है,रज याने धूलि कण,
जा न सके सूरज तक, बहुत दूर है धरती
इसीलिये कहता हूँ,नाम पर मत जाओ,
डंक बड़ा चुभता है,पर बजता है डंका
नाम भ्रमित करते है,माला के दाने का,
वजन एक माशा है,पर कहलाता मनका
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
एक गीत
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एक गीत झूठे-झूठे सपने, झूठे-झूठे वादेमन ख़ुद से करता है सच्ची-सच्ची बातों,
सच की राहों से शायद डरता है !सच की ज्योति जली जो भीतर उससे आँखें
फेरे, सपनों की...
1 दिन पहले
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