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शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

चार पंक्तियाँ -१ 

होता है राहुकाल कभी या है दिशा शूल, 
चक्कर ये शुभअशुभ का ऐसा सर पे चढ़ गया
पंडित से पूछ मुहूरत ,निकले थे काम पर ,
रस्ते में सामने था, काणा एक पड़ गया 
बैठे हम थोड़ी देर, फिर निकले तो ये हुआ ,
रस्ता हमारा निगोड़ी बिल्ली से कट गया 
फिर निकले ,छींक आ गयी ,अब कोई क्या करे ,
सब काम उहापोह में,यूं ही  बिगड़ गया 
 
घोटू 

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