सौवाँ शतक
सचिन,बधाई ढेरों तुमको,तुमने सौवाँ शतक लगाया
हम सब खेलप्रेमियों का था,जो सपना ,सच कर दिखलाया
बहुत दिनों से आस लगी थी,तुम शतकों का शतक लगाओ
करो नाम भारत का रोशन, एसा करतब कर दिखलाओ
सुबह प्रणव दादा ने हमको,मंहगाई का डोज़ पिलाया
सबका मुंह कड़वा कर डाला, एसा मुश्किल बजट सुनाया
मंहगाई से त्रस्त सभी को ,दिए बजट ने खारे आंसू
लेकिन तुमने शतक लगाके,खिला दिए जैसे सौ लड्डू
मुंह का स्वाद हो गया मीठा,भूल गए हम सब कडवापन
तुम्हारे इस महा शतक ने,जीत लिया है हम सबका मन
तुम क्रिकेट के 'महादेव' हो,तुम गौरव भारत माता के
सच्चे 'भारत रत्न'तुम्ही हो,देश धन्य तुम सा सुत पा के
सचिन ,बधाई तुमको ढेरों,तुमने सौवाँ शतक बनाया
हम सब खेलप्रेमियों का था,जो सपना,सच कर दिखलाया
मदन मोहन बहेती'घोटू'
The Primacy of Inquisitiveness : Why & How The Honest Questions Spark True
& Unprecedented Learning
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Abstract
*In an era obsessed with immediate, hyper-intellectual smart solutions, the
fundamental essence of true learning gets often overlooked: t...
8 घंटे पहले
बढिया लिखा है .. आपके इस महत्वपूर्ण पोस्ट से हमारी वार्ता समृद्ध हुई है
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