घोटू के पद
मन,तू ,क्यों कूतर सा भागे
मन तू,क्यों कूतर सा भागे
मै तेरे पीछे दौडत हूँ,और तू आगे आगे
भोर भये तू शोर मचावत ,घर की देहरी लांघे
तेरी डोर ,हाथ मेरे पर, सधे नहीं तू साधे
इत उत सूँघत ,पीर निवारे,इधर उधर भटकाके
रहत सदा चोकन्ना पर तू,रखे मोहे उलझाके
'घोटू'स्वामिभक्त कहाये,निस दिन नाच नचाके
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
808. आज़ादी मिले
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आज़ादी मिले
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जन्म से मिलती है
मृत्यु तक मिलती है
साँस लेने की आज़ादी
पलक झपकाने की आज़ादी
सोचने की आज़ादी
वैसे ही हर इंसान को मिले
समान शिक्षा और स्व...
10 घंटे पहले
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