बाती और कपूर
खुद को डूबा प्रेम के रस में,
तुम जलती हो बन कर बाती
जब तक स्नेह भरा दीपक में,
जी भर उजियाला फैलाती
और कपूर की डली बना मै,
जल कर करूं आरती ,अर्चन,
निज अस्तित्व मिटा देता मै,
मेरा होता पूर्ण समर्पण
तुम में ,मुझ में ,फर्क यही है,
तुमभी जलती,मै भी जलता
तुम रस पाकर फिर जल जाती,
और मै जल कर सिर्फ पिघलता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
गुरु पूर्णिमा पर हार्दिक शुभकामनाएँ
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गुरु पूर्णिमा पर हार्दिक शुभकामनाएँ गुरु का हर इक वचन अनूठा अंधकार मन का हर
लेता, गुरु का दर्शन कितना पावन शिष्य सहज ख़ुद को पा लेता !गुरु हर जगह ईश को
देख...
4 घंटे पहले
bahut achchha. AAbhaar.
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