बाती और कपूर
खुद को डूबा प्रेम के रस में,
तुम जलती हो बन कर बाती
जब तक स्नेह भरा दीपक में,
जी भर उजियाला फैलाती
और कपूर की डली बना मै,
जल कर करूं आरती ,अर्चन,
निज अस्तित्व मिटा देता मै,
मेरा होता पूर्ण समर्पण
तुम में ,मुझ में ,फर्क यही है,
तुमभी जलती,मै भी जलता
तुम रस पाकर फिर जल जाती,
और मै जल कर सिर्फ पिघलता
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
अनुकम्पा नियुक्ति सदैव स्थायी-इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक
आश्रित कोटे (अनुकम्पा नियुक्ति) के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरी हमेशा स्थायी
औ...
1 हफ़्ते पहले
bahut achchha. AAbhaar.
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