नाम पर मत जाओ
सूर है सूरज में,सूर याने चक्षु हीन,
सबको पथ दिखलाता,जग मग कर के जगती
सूरज में रज भी है,रज याने धूलि कण,
जा न सके सूरज तक, बहुत दूर है धरती
इसीलिये कहता हूँ,नाम पर मत जाओ,
डंक बड़ा चुभता है,पर बजता है डंका
नाम भ्रमित करते है,माला के दाने का,
वजन एक माशा है,पर कहलाता मनका
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
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*परदेसी कान्हा**/ **शशि पाधा*
*कैसा उत्सव**, कैसी होली *
*कान्हा तो परदेस ग**ए *
*राधा से पूछें हमजोली*
*लौट आने को क्या कह ग**ए ?*
* भूलके सार...
5 घंटे पहले
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