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शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

दशहरे के दिन

        दशहरे के दिन

दशहरे के दिन,
वो हमारे घर आये
और बोले ,बच्चे तो रावण देखने गए है ,
हमने सोचा,चलो हम आपको ही देख आएं
हम ने कहा,सच,होता अजीब तमाशा है
रावण को देखने सब  जाते है,
राम को देखने कोई नहीं जाता है
आप तो हमेशा से रूढ़ियाँ तोड़ते आये है
अच्छा किया,रावण देखने नहीं गए,
हमें देखने आएं है  
मगर वहां बच्चों को क्या मज़ा आएगा
आप तो यहाँ है ,
बच्चों को रावण कैसे नज़र आएगा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

कह रहे पापी अधम रावण जलाया जायेगा....


गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

सचमुच तुम कितने पागल हो ?

       सचमुच तुम कितने पागल हो ?

बेटा हो या बेटी ,उनमे ,काहे को रखते  अंतर हो 
                       सचमुच तुम कितने  पागल  हो
यही सोच कर बेटा होगा ,वंश बढ़ाएगा तुम्हारा
और बुढ़ापे में तुम्हारे ,देगा तुमको ,बड़ा सहारा
अंधे मातपिता को कांवड़ में ले जाए तीर्थ कराने
ब्रह्माजी ने बंद कर दिए ,है अब ऐसे पुत्र  बनाने
पैदा राम नहीं होते अब ,जो कि निभाने वचन पिता के
राज त्याग,चौदह वर्षों तक,खाक   जंगलों की जो फांके
इस कलयुग में तो सबने ही ,भुला दिए संस्कार पुराने
उनसे मत उम्मीद करो कुछ,हुई 'प्रेक्टिकल 'है संताने
तुम जितना भी,जो कुछ उन हित ,करते ये कर्तव्य तुम्हारा
प्रतिकार में वृद्धाश्रम ही ,देगा शायद ,तुम्हे सहारा
संस्कृति और संस्कारों में ,बहुत बढ़ गया पॉल्यूशन है
केवल अपने ही बारे में ,सोचा करता अब हर जन है
बेटी भले परायी होती,पर उसमे होता अपनापन
ख्याल बुढ़ापे में रखती है ,प्यार लुटाती सारा जीवन
फिर भी तुम बेटी के बदले ,बेटा हो,  देते यह  बल हो
इस पॉल्यूशन के युग मे भी,शुद्ध ढूढ़ते  गंगाजल हो
                               सचमुच तुम कितने  पागल हो
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

आँखें

           आँखें

आँखें ,सबसे बड़ा दिया उपहार प्रभु का,
       चमका करती ,सूरज चंदा सी ,चेहरे पर
भेद बताती ,सुन्दर और असुंदर का ये,
        ज्योतिपुंज सी राह दिखाती है जीवन भर
दो आँखे ,मानव तन की शोभा होती है ,
         हमको जो ये सारी दुनिया दिखलाती है
पर इनकी तासीर बड़ी उल्टी होती है,
        खोई खोई जग कहता , जब मिल जाती है
हो जाता है प्यार,लड़ा करती जब आँखें,
         जब ये झुकती ,मतलब हामी भर देती है
थोड़ी तिरछी हो जाती,बिजलियाँ गिराती ,
         और दुखी होती , आंसूं  ढलका देती है
काला मुख होने पर है बदनामी होती,
        इन पर कालिख लगती ,ये होती कजरारी
कोई मृगनयनी है कोई मीनाक्षी है,
       चंचल,चपल और सुन्दर ये लगती  प्यारी
होती जिसकी एक आँख समदर्शी होता ,
       लोगबाग उसको काणा भी कह देते है
अगर किसी के साथ छेड़खानी करनी है ,
      एक आँख बंद करते ,आँख मार देते है
कोई बारीक काम सुई में धागा पोना ,
       या कि लक्ष्य भेदन करने को तीर चलाना
इनमे एक आँख बंद करके ही देखा जाता ,
      हो पाता  संभव तब ही  ये सब  हो पाना
दो आँखें तो सब की ही मन भावन होती,
       खुले तीसरी आँख ,कोप बरसाती भारी
शिवशंकर त्रिनेत्र ,खोलते नयन तीसरा ,
       होते है जब कुपित,कहाते प्रलयंकारी
और ये ही आँखें जब होती चार किसी से ,
        इसको कहते प्यार हुआ,जब टकराती है
चार आँखें हो जाने का चक्कर है प्यारा ,
          पर इससे ,आँखों की निंदिया उड़ जाती है
ये होती है बंद मगर देखा करती है ,
             सोयी आँखों से सपने देखा करते हम      
तन का यह अंग ,सबसे ज्यादा मूल्यवान है,
              पलकें है तैनात,सुरक्षा करती   हरदम 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

ना इधर के रहे -ना उधर के रहे

          ना इधर के रहे -ना उधर के रहे

ना तो उस दौर के और न इस दौर के ,
             बन गए दरमियानी कोई चीज हम
ना फलक पर चढ़े,ना जमीं पर रहे ,
            रह गए बस लटकते ही अधबीच हम
ना तो भूखे ही है,ना भरा पेट है ,
            बीच खाने के थाली  को क्यों छोड़ दें,
ना इधर के रहे ,ना उधर के रहे ,
           उम्र की ऐसी आ पहुंचे ,दहलीज हम 
जिस्म कहता है अब हम जवां ना रहे,
            कोई बूढा कहे ,दिल ये ना मानता ,
जब जवां लड़कियां हमको अंकल कहे ,
            दिल में होती चुभन,जाते है खीझ हम
ना तो काले ही है ,ना सफ़ेद ही हुए ,
            बाल सर पर हमारे बने खिचड़ी ,
उम्र का फर्क ये , हमको मिलने न दे ,
           रह गए एक दूजे पे ,बस रीझ हम
ना तो दिन ही ढला,ना हुई रात है ,
          शाम की है ये बेला ,बड़ी खुशनुमा ,
है बड़ा ही रूमानी ,सुहाना समां ,
          प्रेम के रस में जाते है अब भीज हम
ना तो नौसिखिया ही है ,ना रिटायर हुए,
          है तजुर्बा भरा ,तन  मे ताक़त भी है,
कोई कितना भी आजमा ,हमें देख ले,
          पायेगा ये बड़े काम की चीज  हम
दिल में जज्बा जवानी का कायम अभी,
           बात दीगर है अब जल्दी थक जाते हम ,
है बुलंदी पे अब भी मगर हौसला ,
            अब करें क्या ,बताओ ना तुम,'प्लीज 'हम

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

आँख मेरी लड़ गयी है

           आँख मेरी लड़ गयी है 

आँख में तुम इस तरह से बस गयी हो,
     सपनो को भी जगह कम पड़ने लगी है
इसलिए तो आजकल गाहे ब गाहे,
         नींद मेरी अचानक उड़ने  लगी  है 
इश्क़ में हालात ऐसे हो गए है ,
      जिधर भी मै देखता हूँ तुम्ही तुम हो,
खुदा जाने होगी तुम कितनी नशीली ,
        देख कर जब खुमारी  चढ़ने लगी है
जबसे तुमसे आँख मेरी लड़ गयी है,
       नज़र तिरछी इस तरह से गढ गयी है,
दिल में मेरे कुछ न कुछ होने लगा है,
         मिलन की संभावना बढ़ने लगी  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

स्वच्छ भारत अभियान

             स्वच्छ भारत अभियान

किया आरम्भ गांधी ने ,जो आंदोलन सफाई का ,
         उसे मोदी नरेन्दर ने ,किया चालू दोबारा  है
स्वच्छ भारत हमारा हो ,यही बस लक्ष्य है मन में,
        स्वयं हाथों में ले झाड़ू ,सभी कचरा बुहारा है
लोग कांग्रेस के कहते,हमारा 'हाथ'है इसमें ,
       और 'आप' पार्टी  कहती ,ये 'झाड़ू'तो हमारा है
सफाई अन्य सरकारों ने भी की है देश की लेकिन ,
       खजाना साफ़ भारत का,कर दिया साफ़ ,सारा है
'घोटू '

महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर

आज के दिन दो महापुरुषों महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती है.... दोनों को नमन करते हुए.... एक बार फिर से प्रस्तुत है मेरा इनके लिये लिखा गया मुक्तक....


महात्मा गांधी
:::::::::::::::::::::::::::::
जो भी था तुम्हारे पास देश पर लुटा गए
हँसते-हँसते देश के लिए ही गोली खा गए,
यूं तो सभी जीते हैं अपने - अपने वास्ते
दूसरों के वास्ते तुम जीना सिखा गए....

लाल बहादुर शास्त्री
::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
तख़्त-ओ-ताज पा के भी आम आदमी रहे
कोशिश की हर जगह सिर्फ सादगी रहे,
करके दिखा दिया कि मुल्क साथ आएगा
शर्त मगर एक कि ईमान लाजमी रहे.....

- VISHAAL CHARCHCHIT

सोमवार, 29 सितंबर 2014

तुम्हारे हाथों में

           तुम्हारे हाथों में
जिन हाथो को हाथों में ले ,होता शादी का संस्कार
जो हाथ पौंछते है आंसू ,और बरसाते है मधुर प्यार
जिन हाथों में रोता बच्चा भी आ किलकारी है भरता 
जिन हाथों में बेलन हो तो,पति बेचारा ,सहमा,डरता
साक्षात रूप अन्नपूर्णा का ,जब घुसे रसोई के अंदर
जिन हाथों में झाड़ू आता ,सारा कचरा होता बाहर
 जो हाथ डांडिया जब लेते , राधा सा रास रचाते है
जब बन जाते है बाहुपाश ,पत्थर को भी पिघलाते है
जिन हाथों में है बागडोर,पूरे घरबार गृहस्थी  की
जो अगर प्यार से सहलाते ,मन में छा जाती मस्ती सी
खा पका हुआ जिनका खाना ,जी करता उन्हें चूम लें  हम
उंगली के एक इशारे पर ,जिसके सब नाच रहे हरदम
जो हमें नचाते ,प्यार जता कर ,अपनी मीठी बातों में
अब सौंप दिया इस जीवन का ,सब भार बस उन्ही हाथों में

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

हम मेट्रिक फ़ैल ही अच्छे

           हम मेट्रिक  फ़ैल ही अच्छे

न तो है हम पढ़े लिख्खे ,नहीं कुछ पास है डिगरी
मगर हम यार यारों के,दोस्त है दोस्त के जिगरी
हमारे वस्त्र मत देखो , बड़ी है सादगी  हम में
हमारी भावना देखो  ,बड़ी है  ताजगी  हम में
भरे है हम मोहब्बत से ,और दिल के है हम सच्चे
पढ़े लिख्खों से तुम जैसे ,हम मेट्रिक फ़ैल  ही अच्छे
पूजते माँ पिता को है ,देवता मान जीवन में
बुजुर्गों के लिये  श्रद्धा ,आज भी सच्ची  है मन में
दिखावे और आडम्बर से हम दूरस्थ रहते है
दाल और रोटी खाकर भी ,हमेशा मस्त रहते है
वचन के पक्के, देते ना किसी को कोई भी गच्चे
पढ़े लिख्खों से तुम जैसे ,हम मेट्रिक फ़ैल ही अच्छे
पुराने रस्म और रिवाज ,हम पूरे निभाते है
कोई मेहमान आता है  ,उसे पलकों बिठाते है
थामते हाथ है उसका  ,जिसे जरूरत सहारे की
 न जिम्मेदारी कोई भी ,कभी हमने  किनारे  की
आज की दुनियादारी में ,भले ही थोड़े है  कच्चे
पढ़े लिख्खे तुम जैसों से,हम मेट्रिक फ़ैल ही अच्छे

मदन मोहन बाहेती' घोटू'

घोटू ,जब हम प्यार जतावत

              घोटू के पद

घोटू ,जब हम प्यार जतावत
आई लव यू ,आई लव यू कह कर ,उनको अपने पास बुलावत
पहले वो ना करत,पास फिर आवत ,  पर   थोड़ी  शरमावत
कोऊ कहीं   देख ना लेहै  ,कह कर फिर  पीछे   हट  जावत
देखत बंद द्वार की कुण्डी ,हमरी  बाहन  में भर  जावत
नव आभूषण और साड़ी का,पिछला वादा ,याद दिलावत
प्यार दिखा उन मधुर क्षणन में ,अपनी सब मांगें मनवावत
पूर्ण रूप तब होइ समर्पित ,एक दूसरे में खो जावत
'घोटू' इन्ही मधुर क्रीड़ाओं को  जगवाले  प्रेम  बतावत

घोटू

समय बड़ा बलवान

             घोटू के पद

समय बड़ा बलवान
नहीं समय के आगे कुछ भी,कर सकता इन्सान
कल तक वीसा देने में भी,था  जिसको  इन्कार
अगवानी कर रहा अमरीका उसकी बांह पसार
मोदी मय न्यूयॉर्क होगया इतना बरसा प्यार
अब वाशिंगटन में ओबामा ,करता है इन्तजार
कल तक चाय बेचने वाला ,बना देश की शान
समय बड़ा बलवान
कल तक पूरे तमिलनाडु पर था जिसका राज
चार साल की सजा पा गयी सत्ता को मोहताज
गलत ढंग से बहुत कमाया ,कुछ ना आया काम
उस पर लगा बड़ा जुर्माना और नाम हुआ बदनाम
राजमहल की रानी थी जो,हुई  जेल मेहमान  
समय बड़ा बलवान
'घोटू '

शुक्रवार, 26 सितंबर 2014

महाराष्ट्र के महत्वकांक्षी

       महाराष्ट्र के महत्वकांक्षी

महत्वकांक्षाओं को ,
अगर दबाया  नहीं जाए  थोड़ा 
तो बन  जाती है,
 जीवन की राह का रोड़ा
रेस में दौड़ना चाह रहा था,
तांगे वाले का घोडा
और इसी चक्कर में ,
उसने ,उससे  गठबंधन तोडा
अक्सर  इस तरह के ,
कई  वाकये नज़र आते है
लोग न इधर के रहते है,
न उधर के हो पाते है
पूरी  पाने की चाह  में,
अपनी आधी  भी  गमाते है
चौबेजी ,छब्बे बनने के चक्कर में ,
दुबे बन कर रह जाते है
घोटू '

महाराष्ट्र का महाभारत

         महाराष्ट्र का महाभारत

                      १
एक तरफ तो पहुँच गया है,यान हमारा मंगल में
एक तरफ हम उलझ रहे हैं,महाराष्ट्र के दंगल में
पदलिप्सा ,अच्छे अच्छों की,मति भ्रस्ट कर देती है ,
और बिचारे फंस जाते है,विपदाओं के  जंगल में
                          २    
एक तरफ बेटा कहता है,पापाजी सी एम  बनो,
          और दूसरी तरफ  भाई ही बढ़ कर राह रोकता है
साथ पुराने साथी का है जिस दिन से हमने छोड़ा,
         अब तो जिसको मिलता मौका ,आकर हमें टोकता है
 जब भी महत्वकांक्षाएं ,होती है हावी हक़ीक़त पर,
         लेते लोग इस तरह निर्णय ,सुन कर हरेक चौंकता है
एकलव्य के तीर हमेशा ,उसका मुंह  बंद कर देते,
          जरुरत से ज्यादा बेमौके,जब भी कोई भोंकता है 
 'घोटू '

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

आशिक़ की आरजू

          आशिक़ की आरजू

रात को आते हो अक्सर,ख्वाबगाह में मेरी ,
        एक झलक अपनी दिखाते ,और जाते हो चले
हमने बोला,छोड़ दो यूं ,आना जाना ख्वाब में ,
        बहुत है हमको सताते ,इस तरह के सिलसिले
ये भी कोई बात है ,जब बंद आँखें हमारी ,
       तब ही मिल पाता हमें है,आपका दीदार  है
खोलते है  आँख जब हम  ,नज़र तुम आते नहीं,
             बीच में मेरे तुम्हारे ,पलक की दीवार है
ना तो तुमको छू सकें ना भर सकें आगोश में,
        दूर मुझसे इतने रहते, नज़र आते पास हो      
भला ये भी इश्क़ करने का तरीका है कोई,
              उड़ा देते नींद मेरी,बढ़ा देते प्यास हो
इसतरह से आओ अब वापस कभी ना जा सको,
            रूबरू अहसास तुम्हारा करूं  मैं  रात दिन
अब तो शिद्दत हो गयी है,तुम्हारे इन्तजार की,
           आओ ना आजाओ बस  अब ,मन लगे ना आप बिन

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

सीताफल

सीताफल

बाहर से कितनी आँखे पर बंधे हुए हम ,
बहुमुखी प्रतिभा वाला है यक्तित्व हमारा
हरेक आँख का अपना गूदा ,अपनी गुठली ,
किन्तु साथ है,तब ही है अस्तित्व हमारा
भीतर से हम मीठे है ,स्वादिष्ट ,रसीले,
बाहर हरे भरे ,आकर्षक दिखलाते है
सीताजी जैसे नाजुक हम सीताफल है,
भरी शराफत,तभी शरीफा कहलाते है
सीताफल जैसा ही भारत देश हमारा ,
अलग अलग है धर्म,आस्था अलग अलग है
किन्तु साथ में बंधे हुए है ,इक दूजे से,
मीठे और शरीफ ,चाहता सारा जग है
घोटू

सीताफल     बाहर से कितनी आँखे पर बंधे हुए हम ,   बहुमुखी प्रतिभा वाला है यक्तित्व  हमारा   हरेक आँख का अपना गूदा ,अपनी गुठली ,  किन्तु साथ है,तब ही है अस्तित्व हमारा   भीतर से हम मीठे है ,स्वादिष्ट ,रसीले,  बाहर हरे भरे ,आकर्षक दिखलाते है   सीताजी जैसे नाजुक हम सीताफल है,  भरी शराफत,तभी शरीफा कहलाते है   सीताफल जैसा ही भारत देश हमारा ,  अलग अलग है धर्म,आस्था अलग अलग है   किन्तु साथ में बंधे हुए है ,इक दूजे से,  मीठे और शरीफ ,चाहता सारा   जग है   घोटू

मंगलवार, 23 सितंबर 2014

ऊधौ ,जाओ तुम्हे हम जाने

          घोटू के पद
  ऊधौ ,जाओ तुम्हे हम जाने

ऊधौ (उद्धव),जाओ तुम्हे हम जाने
कान्हा दूत ,बने आये थे,देने ज्ञान,हमें समझाने
अब मथुरा के सिंहासन के , लगे तुम्हे हैं,सपने आने
हठ के कारण,गति कंस की,तुमभी जानो,हम भी जाने
रोटी हित  जब ,लड़े बिल्लियाँ,बन्दर पाये ,रोटी खाने
आधी छोड़,धाये  पूरी को,मुश्किल हो आधी भी पाने
छब्बे बनने के चक्कर में,चौबेजी ,दुब्बे रह जाने
पुत्र प्रेम में ,गयी सोनिया,तुमहु लगे ,वो ही पथ जाने
सत्ता भूत उतार न पांयें ,कोई तांत्रिक और सयाने
'घोटू' समझदार, रहता है ,गठबंधन में ,बंधे पुराने

घोटू

सोमवार, 22 सितंबर 2014

वादा तो निभाया

           वादा तो निभाया

नेताजी ने वोट मांगे ,दे के सबको ये वचन ,
      बिजली की और पानी की वो व्यवस्था करवाएंगे
और जब  वो चुन के आये,उनने था वादा किया ,
        अपने हर एक काम मे वो,'ट्रांसपरेन्सी 'लाएंगे  
नेताजी तो बन मिनिस्टर ,लगे अपने काम में,
         वादे   बेटी  ने  निभाये , एक   नए अंदाज में
'ट्रांसपरेन्सी 'का था वादा उसके  पापा ने किया ,
          'ट्रांसपरेन्सी 'ले के आई ,अपने वो   लिबास में
इस कदर  के पारदर्शी वस्त्र थे धारण किये ,
         देख  कर उसका  खुलापन  ,गिरी सब पर बिजलियाँ
लोग मारे शर्म के सब ,पानी पानी हो गए,
            बिजली और पानी का  वादा ,इस तरह पूरा किया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

रविवार, 21 सितंबर 2014

मगर हम किस से कहें

      मगर हम किस से कहें

रोज वो हमको सताते ,मगर हम किस से कहें
छेड़तें है आते जाते   ,मगर हम  किस से  कहें
दिखा  कर के लुभाने वाली अदाएं रात दिन ,
छेड़तें है  मुस्कराते ,मगर हम किस से कहें
लहराते चुम्बन हवा में ,कभी करते गुदगुदी ,
हमारे दिल को जलाते,मगर हम किस से कहें
पङ गयी आदत हमें है उनके इस व्यवहार की,
 सहते है हम मुस्कराते  ,मगर हम किस से कहें 
क्या बनाया इश्क़ तूने,क्या बनाई औरतें,
जाल में हम फसे जाते ,मगर हम किस से कहें
चाहते हम उनको इतना ,बिना उनके एक पल ,
भी जुदा  हम रह न पाते,मगर हम किस से कहें
उनकी मीठीमीठी बातें,मन में है रस घोलती ,
हम भी झट से पिघल जाते ,मगर हम किस से कहें
सामने आँखों के आती,उनकी सूरत चुलबुली ,
ठीकसे हम सो न पाते ,मगर हम  किस से कहें

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

धीरज का फल

         धीरज का फल

हमने की ता उम्र कोशिश ,आप मुस्काते  रहें ,
         आपको खुश रखना होता ,कब भला आसान है
कुछ न कुछ तो नुस्ख लेते ढूंढ,गलती बताते ,
          हमेशा आलोचना करना तुम्हारा काम है
उमर के संग हम भी बदले और बदले आप भी ,
           मिल रहे सुर,एक दूजे का  बढ़ा सन्मान है
आप अब हमको सराहते ,करते है तारीफ़ भी,
          ये हमारी तपस्या और  धैर्य का   परिणाम है

घोटू  

कल की यादें-आज की बातें

             कल की यादें-आज की बातें

                             १
याद हमको आते वो दिन ,हम बड़े दिलफेंक थे
दिखने में लगते थे असली ,पर असल में 'फेक'थे
जवानी में खूब जम कर हमने मारी मस्तियाँ ,
अब तो टीवी  हो या बीबी,  दूर से बस  देखते
                    २
हो रही मुश्किल बहुत अब ,कैसे टाइम 'किल'करें
व्यस्त है लाइन सभी की, किसे 'मोबाइल ' करें
इस तरह के बुढ़ापे में ,हो गए हालात  है,
गया 'थ्रिल',तन शिथिल ,अब क्या किसीसे हम मिल करें
                   ३
अपने  बूढ़े दोस्तों संग ,थोड़ी गप्पें हाँक लो
बैठ कर के ,गैलरी में,थोड़ा नीचे झाँक लो
'एक्स्ट्रा करिक्यूलियर एक्टिविटी' के नाम पर,
पड़ोसन क्या कर रही,नज़रें बचा कर ताक लो

घोटू

दुनियादारी

             दुनियादारी            

तुम मेरी तारीफ़ करो और मैं तारीफ़ करूँ  तुम्हारी
यही  सफलता मूलमंत्र है,यही कहाती  दुनिया दारी

मैं तारीफ़ के  पढूं कसीदे ,और आप मेरे गुण  गाओ
जब भी कोई आयोजन हो,मैं तुमको,तुम मुझे बुलाओ
एक दूजे के चमचे बन कर ,हम तारीफों के पुल बांधें ,
रेती में सीमेंट डाल कम ,प्रॉफिट बांटे ,आधे ,आधे
ये सब हम तुम क्यों न करें ,जब ये करती है दुनिया सारी
यही सफलता मूलमंत्र है ,यही कहांती दुनियादारी 

मेरी उंगली रस में डूबे ,मैं रसगुल्ला तुम्हे खिलाऊं
और स्वाद फिर रसगुल्ले का,तुम भी पाओ,मैं भी पाऊं
हुई ऊँट के घर पर शादी, गर्दभ आये गीत  सुनाने
कितना मधुर आपका स्वर है ,लगे ऊँटजी ,उन्हें सराहने
और  गधेजी कहे ऊँट से ,तुम्हारी सूरत अति  प्यारी 
यही सफलता मूलमंत्र है , यही कहाती  दुनियादारी

रोटी हित यदि लड़े बिल्लियाँ ,तो अक्सर ये देखा जाता
न्याय दिलाने वाला बन्दर ,सारी रोटी खुद खा जाता
कौवे के मुख में रोटी हो ,खड़ी लोमड़ी ,भूखी,गुमसुम
करती है तारीफ़  काग की ,कितना  अच्छा गाते हो तुम
न दो  लोमड़ी ,ना बन्दर को,खुद ही खाओ  रोटी  सारी
यही सफलता मूलमंत्र है ,यही कहांती  दुनिया दारी

मदन मोहन  बाहेती'घोटू'

जिसकी तारीफ की वो खुदा हो गया...



शुक्रवार, 19 सितंबर 2014

वो मधुमक्खी हम मधुमक्खा.....


Re: अनमेल जोड़ी



On Thursday, September 18, 2014, madan mohan Baheti <baheti.mm@gmail.com> wrote:
             अनमेल  जोड़ी

गले में बन्दर के देता ,मोतियों का हार  है ,
        गधों के भी भाग्य में ,लिख देता चंचल घोड़ियाँ
पत्नी टीचर ,पति फटीचर ,क्या अजब सा मेल है ,
            खुदा तू भी बनाता है  ,कैसे कैसी जोड़ियां
मैंने उससे पूछा तो ये खुदा ने उत्तर दिया ,
           एक से हों मियां बीबी ,तो' ईगो 'टकराएगा ,
एक बेहतर ,एक कमतर ,कर लेते 'एडजस्ट 'है,
          टिकाऊ होती है अक्सर , इस तरह की जोड़ियां

घोटू

गुरुवार, 18 सितंबर 2014

हीरे और इंसान

          हीरे और इंसान

अफ्रिका के लोग काले ,देश वह अश्वेत का,
          मगर हीरे चमचमाते ,वहां के  मशहूर है
गोरे  ,सुन्दर ,श्वेत लोगों से भरा है अमेरिका,
         वहां के सौंदर्य में ,होता गजब का नूर  है
मगर नकली और सस्ते है 'अमरिकन डायमंड '
        दिखने में अच्छे है, उनमे चमक भी भरपूर है
'इण्डिया'की खदानों में ,हीरे है कम निकलते ,
        मगर जो भी निकलते है,होते वो 'कोहिनूर'है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

अलग अलग अनुभूतियाँ

         अलग अलग अनुभूतियाँ

पिता के चरणो को छूते ,मिलता आशीर्वाद है ,
          तरक्की करते रहें और सदा आगे बढें  हम
माँ की गोदी में रखो सर ,मिलता है मन को सुकून ,
       शांति मिलती ,भूल जाते,दुनिया के रंज औ' सितम
और जब आते है अपनी प्रिया के आगोश मे,
        होश गुम होते है सबके ,हो जाते मदहोश   हम  
लेते है गोदी में जब हम ,अपनी ही औलाद को,
       ममता और वात्सल्य रस में ,भीग जाता सबका मन
बहुत दिन के बाद जब मिलते पुराने दोस्त है,
         अलग ही आनंद होता ,लेते है जब   झप्पियां
 हर मिलन में हुआ करती भावनाएं है अलग ,
           इसलिए हर मिलन में होती अलग अनुभूतियाँ

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

अनमेल जोड़ी

             अनमेल  जोड़ी

गले में बन्दर के देता ,मोतियों का हार  है ,
        गधों के भी भाग्य में ,लिख देता चंचल घोड़ियाँ
पत्नी टीचर ,पति फटीचर ,क्या अजब सा मेल है ,
            खुदा तू भी बनाता है  ,कैसे कैसी जोड़ियां
मैंने उससे पूछा तो ये खुदा ने उत्तर दिया ,
           एक से हों मियां बीबी ,तो' ईगो 'टकराएगा ,
एक बेहतर ,एक कमतर ,कर लेते 'एडजस्ट 'है,
          टिकाऊ होती है अक्सर , इस तरह की जोड़ियां

घोटू

टेढ़ी वो अच्छी लगे

           टेढ़ी वो अच्छी  लगे

टेढ़ीमेढ़ी जिंदगी की ,टेढ़ीमेढ़ी राह है,
         टेढ़ेमेढ़े लोग है पर जिंदगी  अच्छी लगे
गोल लड्डू और होती बर्फियां चौकोर है,
        मगर हमको टेढ़ीमेढ़ी जलेबी अच्छी लगे
टेढ़ीमेढ़ी वक्र रेखा से सजा उनका फिगर ,
       उनकी नज़रें टेढ़ी भी हो ,तो हमें अच्छी लगे
बॉस टेढ़े,खुश उन्हें रखना भी टेढ़ी खीर है,
       सास टेढ़ी,उनकी टेढ़ी बेटी भी अच्छी लगे

घोटू

ये रास्ते है प्यार के

           ये रास्ते है प्यार के

पहले पकड़ा हाथ,उँगलियों को सहलाया ,
       पहुँची पकड़ी,फिर उनकी बाहों तक  पहुंचे
आगे बढ़ फिर उनके गालों को सहलाया ,
      और फिर उनके रेशम से बालों तक पहुंचे
फिर डाला जाता है बाहुपाश का घेरा ,
       एक एक कर ,फिर हर  बंधन खुल जाता है
ऐसे ही बस कदम बढ़ा कर धीरे धीरे ,
      'घोटू' अपनी मंजिल तक पहुंचा जाता   है       
'घोटू '

मोदी जी के जन्मदिन पर

         मोदी जी के जन्मदिन पर

आज विश्वकर्मा दिवस है,करें हम उनको नमन,
      सृष्टिकर्ता ,देवता वह,सृजन का ,निर्माण का
आज मोदी का जन्मदिन ,यह सुखद संयोग है,
      लिया है संकल्प जिसने ,देश नवनिर्माण का
देश का 'प्रगति पुरुष'यह,बड़ी लम्बी सोच है ,
      हौसला मन में भरा है,साथ ले विज्ञान का
 आओ हम तुम, सच्चे दिल से,करें प्रभु से प्रार्थना ,
    पूर्ण होवे स्वप्न उसका ,देश के  उत्थान का

घोटू
(पोस्टिंग में एक दिन के विलम्ब के लिए क्षमा याचना )

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

सच्चा मिलन

        सच्चा मिलन

किलकारी जब भरता ,नन्हा प्यारा  बच्चा ,
         ममता से गोदी में उसको हम भर लेते
मिलते है जब दोस्त पुराने ,दिनों बाद तो ,
           उसकी झप्पी लेते,बाहों में भर लेते 
कोई अपना मिले ,गले उसके लग कर हम,
      काँधे से चिपकाते,अपनापन होता है
किन्तु प्रेम में पागलप्रेमी है जब मिलते,
    बाहुपाश में  बंधते ,वही मिलन होता है

घोटू

चुम्बन

              चुम्बन

कोई बच्चा अगर तुम्हे लगता है प्यारा ,
      तो गोदी में लेकर उसके गाल चूमना
कोई अच्छा लिखता उसकी कलम चूमना ,
    अच्छा कोई पकाता   उसके हाथ चूमना
जो मेहनत करते है चूमे उन्हें सफलता ,
    ये सबके सब ,होते है एकतरफा  चुम्बन
किन्तु मिलन में ,प्रेमीद्वय के लब जब मिलते,
   पागल से रसपान करें,वो सच्चा चुम्बन

घोटू 

वो नरेंदर -ये नरेन्दर

        वो नरेंदर -ये नरेन्दर

था एक नरेंदर ,शिकागो ,जाकर के जिसने दिया ज्ञान
उस तेजोमय तपस्वी का ,छा गया ,विवेकानंद  नाम
भगवां वस्त्रों में सजा हुआ ,माथे पर बांधा था साफा
होगया अमरिका मन्त्रमुग्ध,लख उसके चेहरे की आभा
एक ये नरेंद्र है भारत का ,हर जगह बढ़ा जो रहा मान
छा गया वहां ,ये जहाँ गया ,नेपाल भले हो या जापान
अमरीका में भी इसका जादू ,सर पर चढ़ कर बोलेगा
जब बहा प्यार की गंगा ,सबके मन की गांठे खोलेगा
भारत की शान बढ़ाएगा ,भारत का डंका गूंजेगा
अमरीका में 'मोदी मोदी 'का नारा हर घर गूंजेगा

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

नज़रे इनायत

           नज़रे इनायत

तुम जो भी करो ,है मुनासिब तुम्हे ,
         हम जो भी करें,हम कसूरवार  है
है हमारी खता,सिर्फ इतनी ही बस,
         चाहते है तुम्हे ,करते हम  प्यार है
जो तुम्हारी रजा,वो हमारी रजा ,
         ना तुम्हारी,हमारा भी  इंकार है
ऐसे आशिक़ कहीं भी मिलेंगे नहीं ,
        जो कि होने को कुर्बान ,तैयार है
आप नज़रें उठा कर ,हमें देखती ,
       चाँद का हमको हो जाता ,दीदार है
होगी नज़रे इनायत कभी हम पे भी,
       आएगा वो भी दिन हमको इन्तजार है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मोदी का मेंजिक

              मोदी का मेंजिक

कल तक जिनको अपने घर में ,घुसने से था इंकार  जिन्हे  ,
                   वो  इन्तजार में उनके ही ,अब  पलक बिछाए बैठे है
हम भी वो ही,वो भी वो ही,पर जब से उन पर हुस्न चढ़ा,
                  उनसे मिलने की होड़ मची,सब नज़र  गड़ाये  बैठे  है
उनके चर्चे इस कदर छा रहे है पूरी दुनिया भर में,
                   सब उनसे मिल कर समझौते की आस लगाए बैठे है
नेपाल फ़िदा,जापान फ़िदा ,आ रहा चीन खुद मिलने को,
                   अपने  प्यारे मीदी जी  यूं , दुनिया पर छाये  बैठे है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

रविवार, 14 सितंबर 2014

समर्पण सुख

             समर्पण सुख
फल अगर निज गर्व में ,चिपका रहेगा डाल पर,
टूट कर ना दे किसी को स्वाद तो सड़  जाएगा
पुष्प ,माला में गूथेंगा ,चढ़ेगा  भगवान पर ,
डाल पर ही रहेगा तो  बस यूं ही कुम्हलायेगा
जिंदगी की सार्थकता है समर्पण ,इसलिए ,
तू किसी को समर्पित हो और किसी के काम आ
रूप से भरपूर तुझको ,बनाया भगवान ने,
चाहता हूँ मैं तुझे ,तू बांह  मेरी ,थाम  आ
देख ले ,तू मान जा ,इसमें है तेरा  फायदा ,
सुख किसी को मिलेगा तो सफल होगी जिंदगी
यदि तुम्हारे समर्पण से ,संवरे जीवन किसी का,
इससे बढ़ कर नहीं होती है खुदा की बंदगी

मदन मोहन बाहेती'घोटू;

कमजोर पड़ता दिख रहा अब 'देसी' च्यवनप्रास...




कर्म करके फल पायें
ये आम बात है,
कर्म कोई और करे
लेकिन फल पायें हम
ये खास बात है...

अध्यापक पढ़ाये और
हम मेहनत से पढ़ाई करें
परीक्षा में प्रश्नपत्र हल करें
और तब पास हों
ये आम बात है,
हम करें घुमाई अध्यापक पढ़ाये
वही हल करे प्रश्नपत्र परीक्षा में और
हम अच्छे अंकों से पास हो जायें
तो ये खास बात है...

बच्चे विद्यालय जायें
शिक्षक मन लगाकर पढ़ायें
अधिकांश बच्चे पास हो जायें
ये आम बात है,
बच्चे विद्यालय जायें
शिक्षक चुटकुले सुनायें
पढ़ने के लिये कोचिंग बुलायें
जो जाये कोचिंग सिर्फ वही हो पास
तो ये खास बात है...

महीने भर मेहनत से काम करें
और तब पायें तन्ख्वाह
ये आम बात है,
घर में बैठ कर भी लगे हाजिरी
और पायें मोटी तन्ख्वाह
तो ये खास बात है...

नौ महीने तक तमाम तकलीफें सहें
तब कहीं जाकर मातृत्व सुख मिले
ये आम बात है,
कोई और तकलीफें सहे
हमारी सेहत और सुन्दरता
ज्यों की त्यों बनी रहे
और मातृत्व सुख भी पा जायें
तो ये खास बात है...

हम करें अपराध
पुलिस आये पकड़्कर ले जाये
ये आम बात है,
हम करें अपराध और
हम ही पुलिस बुलायें
अपनी जगह किसी और को पकड़वायें
तो ये खास बात है...

हम पड़ें बीमार
डॉक्टर वसूले भारी फीस
और तब हो हमारा इलाज
ये आम बात है,
हम पड़ें बीमार
कोई और बिल चुकाये
हमारी एक किडनी
डॉक्टर चुपके से उसे थमाये
तो ये खास बात है...

अदालत में चले मुकदमा
सारे सबूत गवाह जुटायें
केस जीत जायें
ये आम बात है,
न गवाह न सबूत लायें
सीधे जज को पटायें
केस जीत जायें
तो ये खास बात है....

हमेशा करें अच्छे काम
हमेशा तारीफ पायें
चर्चित हो जायें
ये आम बात है,
हमेशा करें उल्टे सीधे काम
हमेशा खिंचाई करायें और
खूब चर्चा में आयें
तो ये खास बात है....

अब आप करें फैसला
बनना है आम या खास,
पर इतना जान लीजिये कि
कमजोर पड़ता दिख रहा
अब 'देसी' च्यवनप्रास...

- विशाल चर्चित

पतिदेव से

                 पतिदेव से 

मेरा अंग अंग मुस्काता ,रोम रोम पुलकित होता है ,
इतना  रोमांचित कर देते ,मुझको सहला सहला करके
बाहुपाश में ,ऐसा कसते ,लगता है निचोड़ दोगे  तुम,
तन में आग लगा देते हो ,रख देते हो पिघला कर के
फूलों से कोमल कपोल पर ,करते हो चुम्बन की वर्षा ,
तुम पागल से हो जाते हो,मुझको निज बाहों में भर के
प्यार तुम्हारा ,मन भाता पर ,चुभती है ,तुम्हारी दाढ़ी ,
मेरे गाल न छिल पाएंगे ,यदि आओगे ,शेविंग कर के

मदन मोहन  बाहेती 'घोटू'

मर्यादा

                          मर्यादा
भले चाँद का टुकड़ा हो तुम,परियों जैसा रूप तुम्हारा ,
लेकिन उसका नग्न प्रदर्शन ,तकलीफें देता ज्यादा है
घर की चार दिवारी में तुम,जो चाहो वो कर सकते हो,
लेकिन घर के बाहर तो कुछ ,रखनी पड़ती मर्यादा है

माना आप बहुत सुन्दर है,और काया  है कंचन जैसी
नहीं जरूरी उसे दिखाने ,घूमें बन कर, मेम  विदेशी
परिधानों में ,ढके हुए तन की अपनी सज्जा होती है
तुम्हारा व्यक्तित्व निखरता  ,आँखों में लज्जा होती है
बन शालीन ,लाजवन्ती सी,चलती हो जब नज़र झुका कर
नहीं छेड़ता ,कोई शोहदा ,तुमको सीटी बजा बजा कर
खुले वस्त्र जो तन  दरशाते  ,देते है आमंत्रण  जैसा
इसीलिये कुछ महिलाओं संग ,होता रहता ,ऐसा वैसा
अपना रूप प्रदर्शित करने  के कितने ही मौके  आते
उसे लुभाओ ,जो तुम्हारे ,प्रीतम है,पतिदेव   कहाते

रूप अगर शालीन,लजीला ,जैसे सोना और सुहागा ,
खुद आगे बढ़ ,बोला करता,चाहे कितना ही सादा है
घर की चार दिवारी में तुम ,जो चाहे वो कर सकते हो,
लेकिन घर के बाहर तो कुछ ,रखनी पड़ती ,मर्यादा है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

अब तुमसे क्या मांगूं ?

             अब तुमसे क्या  मांगूं ?

इतना कुछ दे दिया आपने ,बोलो अब तुमसे क्या मांगूं ?

तुम मेरे जीवन में आये ,ज्यों मरुथल में जल की धारा
सूख रहे मन तरु को सिंचित करने बरसा प्यार तुम्हारा
तुमने दिया मुझे नवजीवन ,सूने मन में प्रीत जगाई
टिम टिम  करते बुझते  दीपक में आशा  की ज्योत जगाई
बस जीवन भर बंधा  रहूँ  मैं,इस बंधन में,कहीं न भागूं 
इतना  कुछ दे दिया आपने,बोलो अब तुमसे क्या मांगूं ?

मेरी अंधियारी  रातों में ,बनी चांदनी छिटक गयी तुम
तरु सा मैं तो मौन खड़ा था,  एक लता सी,लिपट गयी  तुम
तन का रोम रोम मुस्काया ,तुमने  इतनी प्रीत जगा दी
मैं पत्थर था,पिघल  गया हूँ ,तुमने ऐसी  आग लगा दी
आओ बाहुपाश में बंध  कर ,तुम भी जागो,मैं भी जागूँ
इतना कुछ दे दिया आपने ,बोलो अब तुमसे क्या मांगूं?

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

शनिवार, 13 सितंबर 2014

बीत गए दिन

       बीत गए दिन

बीत गए दिन अवगुंठन के ,
         अब केवल सहला लेते है
बस ऐसे ही प्रीत जता कर ,
          अपना मन बहला लेते है
जो पकवान रोज खाते थे,
           कभी कभी ही चख पाते है
जोश जवानी का गायब है ,
           अब जल्दी ही थक जाते है
'आई लव यू 'उनको कह देते ,
           उनसे भी कहला लेते है
बस ऐसे ही प्रीत जता कर ,
          अपना मन बहला लेते है
कभी दर्द मेरा सर करता ,
            कभी पेट दुखता तुम्हारा
कभी थकावट, बने रुकावट,
            एक दूजे  से करें किनारा
कोई न कोई बहाना करके ,
             इच्छा को टहला देते  है
बस ऐसे ही प्रीत जता कर,
            अपना मन बहला लेते  है
गया ज़माना रोज चाँद का ,
           जब दीदार हुआ करता  था
मौज ,मस्तियाँ होती हर दिन ,
          जब त्योंहार हुआ करता था
बीती यादों की गंगा में,
           बस खुद को  नहला लेते है
बस ऐसे ही प्रीत जता कर,
           अपना मन बहला लेते है
 शाश्वत सत्य बुढ़ापा लेकिन ,
             उमर बढ़ी और जोश घट गया      
एक दूजे की पीड़ा में ही ,
               हम दोनों का ध्यान  बंट  गया
 शारीरिक सुख ,गौण हो गया ,
              मन का सुख पहला  लेते है
बस ऐसे ही प्रीत जता  कर ,
              अपना मन बहला लेते  है

मदन मोहन बाहेती'घोटू '       




  

मंगलवार, 9 सितंबर 2014

कश्मीर की अवाम से

          कश्मीर की अवाम से

कहाँ गए वो पाकिस्तानी झंडे फहराने वाले ,
           कहाँ हुर्रियत गयी,कहाँ पर बैठा, छुपा ,गिलानी है
पडी आपदा जब जनता पर ,सब के सब लापता हुए,
           त्राहि त्राहि मच रही हर तरफ ,बस पानी ही पानी है
तावी तड़फ़ी,झेलम उफनी,तोड़ सभी मर्यादायें ,
           इतनी नफरत बरसा दी है ,कुछ मजहब के अंधों ने
कितनी बर्बादी होती और कितनी ही जाने जाती ,
          मदद नहीं पंहुचाई होती,अगर फ़ौज के बन्दों ने
तुम भारत का एक अंग हो,भाई हमारे ,प्यारे हो,
           लोग सियासत करते उनको ,जहर घोलना  आता है
तुम पर आफत टूटी,हमने जी भर के सहयोग दिया,
           विपदा में भी भाई भाई का ,सच्चा  साथ  निभाता है
जो कश्मीर स्वर्ग धरती का ,उसको नर्क  बना डाला ,
             इतनी नफरत फैला दी है,इन अलगाववादियों ने
अब तो सोचो ,समझो ,जानो,है हमदर्द कौन ,किसका,
             भाईचारा लौटा लाओ फिर कश्मीर वादियों में

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

कश्मीर की त्रासदी

           कश्मीर की त्रासदी

इस धरती के स्वर्ग के ,यूं बदले हालात
गए देव ,अब कर रहे ,हैं राक्षस   उत्पात
है राक्षस उत्पात, हुआ सब   पानी पानी
फैला रहे  गिलानी  जैसे   लोग  ग्लानि
हुर्रियत होगयी  फुर्र ,देख कर आई मुसीबत
बेबस  जब देवेन्द्र ,    नरेन्दर  बांटे  राहत

घोटू

रविवार, 7 सितंबर 2014

इंजीनियरिंग का घरेलू उपयोग

          इंजीनियरिंग का घरेलू उपयोग

मैंने जो इन्जीनीरिंग की ,की पढाई चार साल,
सोच ये कि अच्छी बीबी, नौकरी मिल जाएगी
क्या पता था गृहस्थी की,समस्याएं मिटाने,
काम में हर रोज मेरी इंजीनियरिग  आएगी
होती जब नाराज़ बीबी ,उड़ता उनका फ्यूज है ,
मैं मनाता,प्यार करता ,हाथ भी हूँ जोड़ता
दौड़ने करंट फिर से लगे दिलके तार में ,
इलेक्ट्रिक इंजीनियर  मैं ,फ्यूज उनका जोड़ता
मंहगी मंहगी गिफ्ट देता ,कितना ही चूना लगे ,
बांधता पुल तारीफों के ,बन सिविल इंजीनियर
महल सपनो के बनाता ,ले के करनी प्यार की,
बनाता हूँ सड़क ,पंहुचूं उनके दिल तक उम्र भर
गृहस्थी का इन्टीरियर ,सजता है और संवरता ,
क्योंकि मुझको आर्किटेक्चर का भी थोड़ा ज्ञान है
बीबी,बच्चे ,सास ,ननदें ,सबका सरकिट जोड़ता ,
इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग का ज्ञान आता  काम है
केमिकल इंजीनियरिग की बदौलत ही आजतक ,
मेरी और बीबीजी की ,अब तक केमेस्ट्री ठीक है
साल्ट हम दोनों के मिलते ,रिएक्शन होता नहीं ,
ये मेरी इंजीनियरिग ने ही दिलाई  सीख   है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

शनिवार, 6 सितंबर 2014

आशिक़ी

           आशिक़ी

ये एकतरफा भी होती है,ये दोतरफा भी होती है ,
            इसे औरत भी करती है,इसे करते मरद भी है
कभी ये जोड़ती भी है,कभी ये तोड़ती भी है,
            कभी ये देती है खुशियां,कभी देती  दरद भी है
आदमी बावला होता ,बोलती सर पे चढ़ कर है ,
            आशिक़ी कोई कहता है ,कहाती मोहब्बत भी  है ,
स्वाद इसका कुछ ऐसा  है,जो चखता याद रखता है,
            कभी मीठी ,कभी खट्टी,गरम भी है,सरद भी  है       

घोटू

बरसात में

          बरसात में
बरसती बरसात में ,गर देख तुमको तर हुआ ,
हुस्न बिखरा सामने हो ,और रीझें  हम नहीं
देख कर भीगे वसन से झांकता सुन्दर बदन ,
संग तुम्हारे ,प्यार रंग में,अगर भीजे हम नहीं
हुस्न की ,इस कदर बेकदरी ,और वो भी हम करें,
बहता दरिया सामने हो,ना लगाएं डुबकियां,
'घोटू'लानत है हमारे ,आशिकी मिज़ाज़ पर ,
समझ लेना ,चचा ग़ालिब के भतीजे हम नहीं
घोटू

उम्र के त्योंहार में

              उम्र के त्योंहार में

क्यों परेशां हो रहे हो  ,तुम यूं  ही  बेकार में
आएगा जब समापन इस उम्र के त्योंहार में
यज्ञ की आहुतियों से ,स्वाह तुम हो जाओगे,
राख यमुना में बहेगी,हड्डियां  हरद्वार  में
तुम उठे,दो चार दिन में 'उठाला 'हो जाएगा ,
तुम्हारी तस्वीर भी,छप सकती है अखबार में
सांस राहत की मिलेगी ,तुम्हारी संतान को ,
तुम्हारी दौलत बंटेगी ,जब सभी परिवार में
अब तो निपटा देते बरसी ,लोग बस एक माह में,
श्राद्ध में  याद आ सकोगे,साल में, एक बार  में
जब तलक संतान है ,बन कर के उनकी वल्दियत,
उनकी तुम पहचान बन कर,रहोगे   संसार   में
सोच कर यह , घर का इंटीरियर ना  जाए  बिगड़ ,
तुम्हारी  तस्वीर भी ना टंगेगी ,दीवार  में
जब तलक है दम में दम और बसे तन में प्राण है,
तब तलक ही तुम्हारा ,अस्तित्व है संसार में

 मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

गुरुवार, 4 सितंबर 2014

हम और तुम

           हम और तुम

तुम हो अंतर्मुखी,मैं हूँ बाहृय मुखी
तुम हो मुझसे दुखी,मैं हूँ तुमसे दुखी
पहले शादी के पत्री मिलाई गयी ,
      गुण है छत्तीस मिले ,पंडित ने पढ़ा
गुण हमारे तुम्हारे न मिलते है कुछ,
      हममे तुममें है छत्तीस का आंकड़ा
मैं हूँ सौ वाट का बल्ब जलता हुआ,
      तुम स्लिम ट्यूब लाइट ,वो भी फूंकी
        तुम हो अंतर्मुखी ,मैं हूँ बाहृय मुखी 
तुम चुपचाप अपने में सिमटी रहो,
         मैं परिंदे सा नीले गगन में  उडूं
है जुदा सोच अपना ,जुदा  ख्याल है ,
        तुम तो पीछे चलो और मैं आगे  बढू
मैं सबसे मिलूं,हंसी ठठ्टा करूं ,
        और नज़रें तुम्हारी ,झुकी की झुकी
        तुम हो अंतर्मुखी ,मैं हूँ बाहृय  मुखी
मुझ को लगती है मौज और मस्ती भली,
       और तुम सीरियस ,खुद में खोई रहो
है रस्ते हमारे अलग ही अलग ,
          मैं तो पश्चिम बहूं और तुम पूरब बहो
मैं तो चाहता हूँ चलना बुलेट ट्रेन सा ,
         तुम हो अड़ियल सी  भैंसा गाडी ,रुकी
          तुम हो अंतर्मुखी ,मैं हूँ बाहृय मुखी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू' 

जोश- बुढ़ापे में

         जोश- बुढ़ापे में

उठो,जागो,पड़े रहने से न कुछ हो पायेगा ,
                     अगर कुछ  करना है तुमको ,खड़ा होना  चाहिए
यूं ही ढीले पड़े रह कर ,काम हो सकता नहीं,
                      जोश हो और हौसला भी,बड़ा होना  होना  चाहिए
इस बुढ़ापे  में भला ये सब कहाँ हो पायेगा ,
                       ये ग़लतफ़हमी तुम्हारी ,सोचना ये छोड़ दो,
पुरानी माचिस तीली भी लगा देती आग है ,
                        मसाला माचिस पर लेकिन ,चढ़ा होना चाहिए

घोटू

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