चोरी की परमिशन
यदुवंशी किशन कन्हैया,
खुद माखन चुराते थे
और साथी ग्वालबालों से,
ये भी कहते जाते थे
तुम भी थोडा माखन चुरा सकते हो,
अपना ही माल है
और जन्माष्टमी के अवसर पर,
एक यदुवंशी नेता ने,
कृष्णजी की याद में,
यदि अपने अफसरों को,
थोड़ी बहुत चोरी करने की परमिशन देदी,
तो फिर क्यों बवाल है?
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
सागर सी आत्मा
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सागर सी आत्मा दिन-रात सागर में लहरें उठती हैं फेन, बुदबुदे, तरंगें सभी तो
जल हैं !आत्मसिन्धु में वृत्तियाँ भाव, विचार, कल्पनाएँ सभी तो ऊर्जा हैं
!!सागर अपन...
8 घंटे पहले
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