वेलेन्टाइन सप्ताह आरम्भ
1
इश्क हो या प्यार हो या मोहब्बत कुछ भी कहो,
प्रेम के हर नाम में ,आधा अधूरा हर्फ़ है
लैला मजनू की कहो या सोहनी महिवाल की,
दास्ताने पुरानी ,इतिहास में अब दर्ज है
हीर रांझा ,और कितने आशिकों की जोड़ियाँ,
बेपनाह जिनमे मोहब्बत थी ,मगर मिल ना सके ,
इसका कारण था कि इनमे हर किसी के नाम में,
हर्फ़ थे पूरे सभी, कोई न आधा हर्फ़ है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
1477-नया साल
-
*नया साल/ डॉ.सुरंगमा यादव*
*-0-*
*2-साल पुराना चला गया /डॉ. कनक लता*
*कुछ खट्टे**, कुछ मीठे, कुछ कड़वे लम्हों को सँजोया गया*
*कभी ख़ुशनुमा हुई ज़ि...
1 दिन पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।