मन- बसंत
मन बसंत था कल तक जो अब संत हो गया
अभिलाषा ,इच्छाओं का बस अंत हो गया
जब से मेरी ,प्राण प्रिया ने करी ,ठिठौली ,
राम करूं क्या ,बूढा मेरा कंत हो गया
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
संबंधों का सफ़र
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समाप्ति की क़गार पर खड़े
बोझिल संबंधों के कदम,
छटपटाते बेचैन हो,
दहलीज पार करने को,
लुभा रहा जो आकर्षण,
बाहर की दुनिया का,
तो चेता रहे ,
रोक ...
1 दिन पहले
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