मै क्या करूं
पत्नी की सुनता तो 'जोरू का गुलाम'हूँ,
माँ की सुनता,तुम कहती 'मम्मी के चमचे'
बच्चों को डाटूँ तो कहलाता हूँ 'जालिम',
करूं प्यार तो कहती मै 'बिगाड़ता बच्चे'
घर पर रहता तो कहते मै 'घर घुस्सू'हूँ,
बाहर रहूँ घूमता 'आवारा ' कहलाता
कम खाता तो कहती मै 'कमजोर हो रहा',
'मोटे होकर फूल रहे' यदि ज्यादा खाता
खर्चा करता तो कहती हो 'खर्चीला 'हूँ,
ना करता तो कहती हो 'कंजूस'बहुत मै
मेरी समझ नहीं आता ,क्या करूं ना करूं ,
कोई बताये क्या करना कन्फ्यूज बहुत मै
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
वही वही
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आकाश एक वही अनंत आकाश झरता है जिसमें से परम प्रकाश वही आश्रय है हमारा उपजे
उसी से उसी में समा जाएँगे कुछ पल डोलेंगे यहाँ इंद्रधनुष की तरह देखते-देखते
विली...
2 दिन पहले
वाकई बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन है
जवाब देंहटाएंआभार