कुम्भ स्नान और हादसा
हरेक बारह वर्षों के बाद में
हरद्वार,उज्जैन,नासिक और प्रयाग में
आता है कुम्भ का पर्व महान
और खुल जाती है धर्म की दुकान
साधू,सन्यासी,संत और महंत
साधारण आदमी और श्रीमंत
सभी का रेला लगता है
बहुत बड़ा मेला लगता है
सर पर पोटली,मन में आस्था
बस से,रेल से,या चल पैदल रास्ता
भीड़ ल गा करती,पुण्य कमाने वालों की
एक डुबकी लगा कर के,मोक्ष पानेवालों की
धर्म के ठेकेदार बतलाते है
यहाँ एक खास दिन नहाने से ,पाप धुल जाते है
और मोक्ष के द्वार खुल जाते है
आज के जमाने में ,मोक्ष इतनी सस्ती मिल जाती है
पुण्य की लोभी ,जनता खिंची चली आती है
ग्रहों का एसा मिलन,बर्षों बाद होता है
ऐसे में स्नान और दान से ,पुण्य लाभ होता है
करोडो की भीड़
न ठिकाना न नीड़
डुबकी लगा कर,
पुण्य कमा कर ,
जब वापस जाती है
स्टेशनों पर भगदड़ मच जाती है
सेंकडो लोग इस भगदड़ में दब जाते है
कितनो के ही प्राण पंखेरू उड़ जाते है
कोई सरकार को दोषी ठहराता है
कोई इंतजाम की कमी बतलाता है
कोई कहता जिनने सच्ची श्रद्धा से डुबकी लगाई
उसे पुण्य लाभ मिल गया और मोक्ष पायी
हादसे होते ही रहते है ,पर लोग जाते है
सस्ते में पाप धोते है,डुबकी लगाते है
धर्म के नाम पर,गजब है इनका हौंसला
राम जाने,कब मिटेगा ये ढकोसला
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
The Vector of a Virtuous Life: Harmonizing Action and Dharma
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*How Classical Indian Philosophy and Modern Physics Solve the Modern Crisis
of Purpose of Our Life*
As we used to study in elementary physics duri...
1 दिन पहले
Sach kaha aapane
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