साहित्य सुरभि: अग़ज़ल - 26: कोई भी तो नहीं होता इतना करीब दोस्तो खुद ही उठानी पडती है अपनी सलीब दोस्तो. दोस्त बनाओ मगर दोस्ती पे न छोडो सब कुछ क्य...
कुढ़ना और मुस्कुराना
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कुढ़ना और मुस्कुराना ‘कुढ़ना’ यानि मन ही मन उस बात की शिकायत करना जो है ही
नहीं, हुई ही नहीं और हो सकती ही नहीं वाक़ई कितना बेमानी है कुढ़ना और कितना
अर्थव...
17 घंटे पहले

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