किसी के सामने भी जो
नहीं झुकता अकडता है
उसे अपने ही जूतों के
सामने झुकना पडता है
सरस्वती -वन्दना
-
* डॉ.सुरंगमा यादव*
*प**द्मासना वीणापाणि, ज्ञान गरिमादायिनी*
*श्वेतवसना*
*, शुभ्रवर्णा, हस्त पुस्तकधारिणी है प्रणत मन तव चरण में ,तुम कृपा...
16 घंटे पहले
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