किसी के सामने भी जो
नहीं झुकता अकडता है
उसे अपने ही जूतों के
सामने झुकना पडता है
नाम...
-
तुम्हारा नाम याद करने की कोशिश कर रही हूँ
जाने किस नाम से पुकारती थी तुम्हें उन दिनों…
चेहरा एकदम साफ़ उतर आता है आँखों के आगे
जैसे सामने देख रही हूँ कोई ...
3 घंटे पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।