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बुधवार, 6 मार्च 2013

घोटू के सवैये-रसखान का अंदाज

       घोटू के सवैये-रसखान का अंदाज
                  1
काँपे क्लर्क और चपरासी,बाबू, और अफसर घबराये
व्यापारी,सप्लायर ,ठेकेदार ,रोज ही शीश  नमाये 
जा की एक डांट से थर थर ,काँपे लोग,सहम सब जाये 
ताहे ससुर की छोहरिया ,अपनी उंगली पर नाच नचाये
                     2
माल में ढून्ढयो,बजारन , गलियन ,बाग़ बगीचे सब बिचरायन
कालिज को ले नाम गयो पर पहुँचो न ,प्रिंसिपल  बतलायन
ढूँढत  ढूँढत हार गयो ,'घोटू'  बतलायो न   ,लोग,  लुगायन 
देख्यो दुरयो  वह पीज़ा हट में,गर्ल फ्रेंड संग मौज उडायन 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मै नहीं माखन खायो

               घोटू के पद 
      मै नहीं माखन खायो

बीबीजी मोरी ,मै नहीं माखन खायो
आध किलो माखन को टिक्को,कल ही तो थो आयो
आज तोहे वो कम लागत है,शक है मैंने  खायो
मोहे तो माखन वर्जित है,क्लोरोस्टाल  बढायो
होय  सकत है ,चूहा खायो,या गर्मी पिघलायो 
तेरे माखन से गालन से ,अब तो मन बहलायो
'घोटू'यह सुन बीबीजी खुश,ले उर कंठ लगायो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

सर ऊपर उठाना है

 सर ऊपर उठाना है

अगर आवाज को अपनी ,बुलंदी से सुनाना है
अगर सोये हुओ को जो,तुम्हे फिर से  जगाना है
बिना गर्दन किये ऊंची,न मुर्गा बांग दे सकता ,
तुम्हे भी आगे बढ  कर ,अपना सर ऊपर उठाना है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

होली के रंग-बुजुर्गों के संग

      होली के रंग-बुजुर्गों के संग


हम बुजुर्ग है ,एकाकी है

पर अब भी उमंग बाकी है

हंसी खुशी से हम जियेंगे,

जब तक ये जीवन बाकी है

अपनों ने दिल तोडा तो क्या ,

हमउम्रों का संग बाकी है

बहुत लड़ लिए हम जीवन में,

 अब ना कोई जंग बाकी है

मस्ती में बाकी का जीवन,

जी लेने के ढंग बाकी है

आओ मौज मनाये मिलकर ,

होली वाले रंग बाकी है

ऐसे होली रंग में भीजें,

सूखा कोई न अंग बाकी है


मदन मोहन बाहेती'घोटू'

सोमवार, 4 मार्च 2013

व्यथा कथा

          घोटू के पद             
          व्यथा कथा 
प्रीतम,तुम जागो मै सोऊँ 
अपनी प्रीत गजब की ऐसी  ,खुश होऊँ या रोऊँ
तुम खर खर खर्राटे भरती ,मै सपनो में खोऊँ
थकी रात को तुम जब आती,काम काज निपटा कर
इधर लिपटती ,निंदिया मुझसे ,मुझे अकेला पाकर
तुम भी सोता देख चैन से ,मुझको नहीं सताती
अपना पस्त शरीर लिए तुम,करवट ले सो जाती
और सुबह चालू  हो जाता,रोज रोज  का चक्कर
काम काज में तुम लग जाती,और मै जाता दफ्तर
कोई न कोई आये सन्डे को,मै कैसे खुश होऊँ
प्रीतम ,तुम जागो मै सोऊँ
मदन मोहन बाहेती'घोटू'

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