मरने पर ........
जीते जी तीर्थ न करवाये,
मरने पर संगम जाओगे
भर पेट खिलाया कभी नहीं,
पंडित को श्राद्ध खिलाओगे
बस एक काम ही एसा है,
जो तब भी किया और अब भी किया,
जीते जी बहुत जलाया था,
मरने पर भी तो जलाओगे
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
सत्तरवाँ साल
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*पहले उतरी बालों में चाँदी *
*और फिर उखड़े दो-चार दाँत *
*दुख-सुख की आड़ी-तिरछी सी ,*
*चेहरे पे उतरीं लकीरें तमाम *
*हथेलियों पर उभरीं नीली-नीली नसे...
1 घंटे पहले
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