मरने पर ........
जीते जी तीर्थ न करवाये,
मरने पर संगम जाओगे
भर पेट खिलाया कभी नहीं,
पंडित को श्राद्ध खिलाओगे
बस एक काम ही एसा है,
जो तब भी किया और अब भी किया,
जीते जी बहुत जलाया था,
मरने पर भी तो जलाओगे
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
1493
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*डॉ**. सुरंगमा यादव की कविताएँ*
* 1 यूँ हीं न मिले कुछ *
फलक पर सितारे न यूँ ही सजे हैं
सिफ़र से शिखर तक जमाने लगे हैं
खुशियों का मौसम न यूँ ही मि...
22 घंटे पहले
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