पते की बात
भगवत उचाव
तू वही करता है जो तू चाहता
मगर होता वही जो मै चाहता
तू वही कर ,जो की मै हूँ चाहता
फिर वही होगा जो है तू चाहता
घोटू
वसंत पंचमी
-
वसंत पंचमी खिले कुसुम महकी अमराई मधु वासंती पवन बही है, ऋतुराजा का
स्वागत करने क़ुदरत सारी निखर रही है ! सरसों फूली खलिहानों में कण-कण जीवंत
हुआ भू का...
3 घंटे पहले