तिलहन,दलहन और दुल्हन
लोग क्लोरोस्ट्राल से घबराते है
इसलिए तेल कम खाते है
फिर भी तेल के दाम बढे जाते है
उपज कम है,इसलिए ,मंहगी है तिलहन भी
सब तरफ दाल में काला ही काला है
मंहगाई ने सबका दम ही निकाला है
दाल बिना रोटी का सूखा निवाला है
कम होती है पैदा,मंहगी है, दलहन भी
नारी तो है देवी,नारी है मातायें
लेकिन नारी को ही,अब बेटी ना भाये
नहीं रुकी कन्या के भ्रूण की हत्याएं
हो जाएगी दुर्लभ,तब मिलना दुल्हन भी
मदन मोहन बहेती'घोटू'
अहंकार का भोजन दुख है
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अहंकार का भोजन दुख है माँ की कृपा से कटती माया राग-द्वेष के बंधन
काटे, ऊँची-नीची लहरों में भीसमता का इक कमल खिला दे !सत् चित् आनंद स्वरूप
है मानव ख़ुद का भ...
16 घंटे पहले

