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गुरुवार, 12 दिसंबर 2019
【SEAnews:India Front Line Report】December 10, 2019 (Tues) No. 3938
मंगलवार, 10 दिसंबर 2019
जब बूढ़े होते भाई बहन ,मिल बैठ किया करते बातें
आँखों आगे जीवित होती ,बचपन की कितनी हीयादें
हम सात बहन और भाई थे दिन भर करते रहते मस्ती
तबकितनी रौनक़ रहती थी घरमें थी चहलपहलबसती
इक दूजे संग लड़ना झगड़ा करना शिकायतें मारपीट
वो ग्रूपबाज़ी ,क़ट्टीबट्टी,वो प्रेमभाव वो हारजीत
पर करे लड़ाई कोई अन्य तो सब मिलकरकरते प्रहार
दिवाली की आतिशबाज़ी वो रक्षाबंधन त्योहार
वो ताश खेलना छुपछुप कर छतपर सोनेवाली रातें
जब बूढ़े होते भाई बहन मिल बैठ कभी करते बातें
गर्मी की छुट्टी होते ही वो नानी के घर पर जाना
वो आम चूसना जी भर कर जामुन खाना खिरनीखाना
नानी डब्बे से चुपके से लड्डू मठरी चोरी करना
वो देर रात स्टोव जला छतपर चुपके हलवा बनना
मामा को मक्खनमार मार वो उनके संग पिक्चर जाना
और चाटपकोड़ी ठेले पर दस दस पानीपूरी खाना
वो स्वाद यादकर कभीकभी हम अब भीहँसतेमुसकाते
जब बूढ़े होते भाई बहन मिल बैठ कभी करते बातें
बड़े भाई और दीदी में हरदम ही रहती थी खटपट
मझली चमची थी भैया के सबकाम किया करती झटपट
छोटी भोली बन मँझले की चुग़ली लगवाया करती थी
और आँसू बहा पिताजी से उसको पिटवाया करतीथी
वो रोज़ सवेरे भैया का लाना जलेबियाँ गरम गरम
वो स्वाद रसीला प्यारासा क्या कभी भूल पायेंगे हम
बस यूँ ही शिकायत शिकवे में बीता बचपन हँसते गाते
जब बूढ़े होते भाई बहन मिल बैठ कभी करते बातें
जब बड़ी बड़ी हो जाती थी पड़ जाते थे छोटे कपड़े
उनके सुंदर कपड़े लेने , होते थे छोटों में झगड़े
स्कूल की किताबें भाई की छोटे सब काम में लाते थे
पढ़ने की दिक्कत होमवर्क चोटों का बड़े कराते थे
ना था मोटा स्कूल बेग नस मँहगीमँहगी ट्यूशन थी
कक्षा में प्रथम कौन आये आपस में कंपीटिशन थी
खाने को कलाकंद मिलता जब थे अच्छे नम्बरआते
जब बूढ़े होते भाई बहन मिल बैठ कभी करते बातें
जैसे जैसे हम बड़े हुये परिवार हो गया तितर बितर
पढ़ने को भाई गये बाहर शादी की गये नौकरी पर
धीरे धीरे सब बहने भी शादी करवा हो गयी बिदा
वीरान हो गया वो आँगन रहती थी रौनक़ जहाँ सदा
रह गये अकेले माँ बापू सूनाहो गया चहकता घर
आजाते लेने ख़ैर ख़बर भाई मिलने त्योहारों पर
ये क़िस्सा नहीं हमारा है ये तो है घर घर की बातें
जब बूढ़े होते भाई बहन मिल बैठ किया करते बातें
चस्का चुनाव का
एक नवधनाढ्य से ,जब सम्भल नहीं पायी उसकी माया
तो उसे चुनाव लड़ कर नेता बनने का शौक चर्राया
वो मेरे पास आया
और बोला ,मैं अपनी जयजयकार सदा देखना चाहता हूँ
खुद को फूलों की मालाओं से लदा देखना चाहता हूँ
इसलिए मन कर रहा है नेता बनू और चुनाव लड़ूँ
आप बताइये कौनसी पार्टी ज्वाइन करूँ
मैंने कहा कई पार्टियों के प्रमुख होते है बड़े विकट
करोड़ों में बेचते है चुनाव का टिकिट
तुम उनके चक्कर में मत पड़ो
इससे बेहतर है कि इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ो
कई बार चुनाव के बाद नतीजों की ऐसी स्तिथि आती है
जब किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता,
तब इंडिपेंडेंट केंडिडेट की वेल्यू बहुत बढ़ जाती है
ऐसे में उसके भाग्य का कमल ऐसा खिलता है
कि धन के साथ साथ ,उसे मंत्री पद भी मिलता है
वो ललचाया और बोलै ठीक है मैं इंडिपेंडेंट चुनाव लडूंगा
पर इस राह पर आगे कैसे बढूंगा
हमने कहा इसके लिए आपको ,सबको सर झुका कर ,
प्रणाम करने की आदत डालनी होगी
और अपना गुणगान करनेवाले चमचों की
एक फ़ौज पालनी होगी
गरीब जनता के वोट पाने के लिए उन्हें लुभाना पड़ता है
पैसा और दारू ,पानी की तरह बहाना पड़ता है
पर ये काम आसान नहीं है ,
अन्य पार्टियों की नज़र से बचना पड़ता है
और जब आचार संहिता लग जाती है ,
तो बहुत संभल कर चलना पड़ता है
आप अपने चमचों से अलग अलग संस्थाएं
जैसे ' महिला उत्थान समिति 'बनवाये
और उनसे 'मातृशक्ति महिमा मंडन 'जैसे ,
समारोहों का आयोजन करवाए
अपने आपको ऐसे समारोहों का मुख्य अतिथि बनवाएं
और वो आपके हाथों हर महिला को ,
साडी ,सिलाई मशीन या अन्य गृह उपयोगी
उपकरण भेंट करवाये
इसीतरह युवा विकास केंद्र 'स्थापित करवा ,
युवाओं को टेबलेट लेपटॉप का आपके हाथों वितरण होगा
और आपका प्रभावशाली भाषण होगा
वरिष्ठ नागरिक सेवा केंद्र '
सीनियर सिटिज़न सन्मान समारोह का आयोजन करवा
आपके हाथों बुजुर्गों को शाल अर्पित करवाएंगे
और आपके वोट सुनिश्चित हो जाएंगे
इसमें पैसा तो आपका लगेगा पर कोई और दिखायेगा खर्चा
मुख्य अतिथि के रूप में आपका होगा चर्चा
लोग आपको पहचानने लग जाएंगे
और जब ये इन्वेस्टमेंट वोट में परिवर्तित होगा ,
आपके भाग्य जग जाएंगे
ये चुनाव का खेल बड़ा कॉम्प्लिकेटेड है ,आसान नहीं है
कई हथकंडे अपनाने पड़ते है ,आपको ज्ञान नहीं है
पर जब एक बार आप पूरे उत्साह और लगन के साथ
खेल के मैदान में उतरेंगे
तो अपनी बुद्धि और धन के बल पर ,
नैया पार लगा ही लेंगे
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
ये भूलने की बिमारी
कल पत्नीजी ने फ़रमाया
कि बढ़ती हुई उमर के साथ
कमजोर होती जारही है उनकी याददाश्त
आजकल वो कई बार ,
कई लोगों के नाम भूल जाती है
किसी काम के लिये निकलती है
पर वो काम भूल जाती है
कोई चीज कहीं पर रख कर ,
ऐसी दिमाग से उतरती है
कि उसकी तलाश ,
उसे दिन भर परेशान करती है
कई बार दूध गैस पर चढ़ा देती है
पर ध्यान नहीं रहता है
पता तब लगता है जब दूध ,
उफन कर गैस स्टोव पर बहता है
ये बुढ़ापे के आने की निशानी है
ये याददाश्त का इस तरह होना कम
लगता है अब धीरे धीरे ,
बूढ़े होते जा रहे है हम
मैंने कहा सच कहती हो उस दिन ,
जब पार्टी में मैंने तुम्हे 'हनी 'कह कर पुकारा था
आश्चर्य और शर्म से चेहरा लाल हो गया तुम्हारा था
तुम शर्माती हुई मेरे पास आयी थी
बड़ी अदा से मुस्कराई थी
और बोली थी की जवानी में ,
जब आप मुझ पर मरते थे
तब मुझे 'हनी 'पुकारा करते थे
आज अचानक मुझ पर ,
इतना प्यार कैसे उमड़ आया है
मुझे हनी कह कर बुलाया है
मैंने उसे तो बहला दिया यह कहकर
तुम्हारा रूप लग रहा था जवानी से भी बेहतर
पर हक़ीक़त को मै कैसे करता उसके आगे कबूल
दरअसल मै नाम ही उसका गया था भूल
जब बहुत सोचने पर भी नाम याद नहीं आया
मैंने 'उनको हनी 'कह कर था बुलाया
पर ये सच है कि जैसे जैसे ,
उमर आगे की और दौड़ती है
आदमी की याददाश्त घट जाती है ,
पर पुरानी यादें पीछा नहीं छोड़ती है
एक तरफ ताज़ी बाते भूलने लगती है
दूसरी तरफ पुरानी यादों की फाइल खुलने लगती है
ये भूलने की बिमारी
पड़ती है सब पर भारी
पर ये भूलने का रोग बड़ा अलबेला है
इसे हमने बुढ़ापे में ही नहीं ,जवानी में भी झेला है
मुझे याद है जब हमें प्यार हुआ था
जिंदगी में पहली पहली बार हुआ था
हम तुम्हारे प्यार में इतना मशगूल हुए थे
यादो में खोये रहते,,खानापीना भूल गए थे
तुम्हे प्रेमपत्र लिख कर पोस्टबॉक्स में डाल आते थे
पर उस पर टिकिट लगाना भूल जाते थे
तुमने पहली नज़र में ,मेरा दिल चुरा लिया था
बदले में मैंने अपना दिल तुमको दिया था
और फिर हम दोनों प्यार में इस कदर खोगये थे
कि ताउम्र एक दुसरे के हो गए थे
और हमारे इश्क़ की भूल की ,
ये दास्ताँ इसलिए ख़ास है
कि आज भी मेरा दिल तुम्हारे पास और
तुम्हारा दिल मेरे पास है
एक दुसरे के दिल में धड़कता है
बिना मिले चैन नहीं पड़ता है
आजकल जवानी में भूलने का,
एक और अंदाज नज़र आने लगा है
जो बुजुर्गों को सताने लगा है
जब माँ बाप बूढ़े और लाचार हो जाते है
जवान बच्चे उन्हें तिरस्कृत कर भुलाते है
वो ये भूल जाते है कि जवानी की इस भूल के
परिणाम उन्हें भी भुगतने पड़ेंगे
जब वो बूढ़े होंगे तो उनके बच्चे भी ,
उनकी और ध्यान नहीं देंगे
इसलिए भूल कर भी अपने बूढ़े माबाप को मत भूलना ,
वर्ना ये होगी आपके जीवन की सबसे बड़ी भूल
उनके आशीर्वाद आपके लिए वरदान है ,
और चन्दन होती है उनके पांवों की धूल
उस धूल को अपने सर पर चढ़ाओ
और सदा सुखी रहने का आशीर्वाद पाओ
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
मेरे प्यार का दुश्मन
ये कान लगा कर सुनती है जब वो इनसे कुछ कहता है
ये उससे चिपकी रहती है ,वो इनसे चिपका रहता है
ये मेरी ओर देखती ना ,बस उससे नज़र मिलाती है
और एक हाथ से पकड़ उसे ,फिर दूजे से सहलाती है
वो थोड़ी सी हरकत करता तो उसके पास दौड़ती है
हद तो तब होती बिस्तर पर भी ,उसको नहीं छोड़ती है
वो नाजुक नाजुक हाथ कभी ,सहलाया करते थे हमको
बालों में फंसा नरम ऊँगली,बहलाया करते थे हमको
वो ऊँगली हाथ सलाई ले ,सर्दी में बुनती थी स्वेटर
सर दुखता था तो बाम लगा ,जो सहलाती थी मेरा सर
वो ऊँगली जिसमे चमक रहा अब भी सगाई का है छल्ला
हो गयी आज बेगानी सी ,है छुड़ा लिया मुझसे पल्ला
ऐसी फंस गयी मोहब्बत में ,उस स्लिम बॉडी के चिकने की
करती रहती है चार्ज उसे ,और मेरे पास न टिकने की
वो इन्हे संदेशे देता है ,घंटों तक इनको तकता है
अपने सीने में खुले आम ,इनकी तस्वीरें रखता है
उससे इनने दिल लगा लिया ,और तोड़ दिया है मेरा दिल
मेरी जान का दुश्मन मोबाईल ,मेरे प्यार का दुश्मन मोबाईल
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
प्यार करो तुम 'स्टाइल 'से
इश्क़ नहीं आसान जरा भी ,
ये तो है एक आग का दरिया
इसमें डूबो ,तब जानोगे ,
तकलीफें होती है क्या क्या
मुश्किल बहुत पटाना लड़की ,
कई बेलने पड़ते पापड़
उसके घर के और गलियों के ,
कई लगाने पड़ते चक्कर
अपनी चाह प्रकट करने का
कोई खोजना होगा रस्ता
,प्रेम प्रदर्शन करना होगा ,
लेकिन आहिस्ताआहिस्ता
उसके मन को मोहित करने ,
के उपाय अपनाने होंगे
प्रेम नीर से सींचों उपवन
तब ही पुष्प सुहाने होंगे
कई जतन करने पड़ते है ,
यार मिला करता मुश्किल से
इसीलिये यदि प्यार करो तो ,
प्यार करो तुम स्टाइल से
लड़की होती है शरमीली ,
धीरे धीरे हाथ आएगी
जल्दी जल्दी अगर करोगे ,
तो वो शायद भड़क जायेगी
जैसी तड़फ तुम्हारे दिल में ,
उतनी उसमे भी जगने दो
थोड़ी थोड़ी आग मिलन की
उसके दिल में भी लगने दो
उसका हृदय जीतना होगा ,
धीरे धीरे ,नहीं एकदम
मत बरसो घनघोर घटा से ,
बरसो तुम सावन से रिमझिम
अगर प्यार के मीठे फल का ,
सच्चा स्वाद तुम्हे है चखना
तो फिर उसके पक जाने तक ,
तुम्हे पड़ेगा धीरज रखना
समय लगेगा ,किन्तु लगेगी ,
तुम्हे चाहने ,सच्चे दिल से
इसीलिये यदि प्यार करो तो ,
प्यार करो तुम स्टाइल से
टाइम लगता ,आसानी से ,
नहीं कोई लड़की पटती है
उसके मन की झिझक हमेशा ,
धीरे धीरे ही घटती है
तुम्हे प्रतीक्षा करनी होगी ,
झटपट की मत करना गलती
तुम उतावले हो जाते हो ,
वो न पिघलती इतनी जल्दी
दे उपहार ,उसे बहलाओ ,
उसकी जुल्फों को सहलाओ
दिल में घुसो ,नयन द्वारे से ,
'आई लव यू 'उससे कहलाओ
इतनी मन में आग लगा दो ,
कि वह भी हो जाय दीवानी
मिलन प्रेमियों का हो जाए ,
हो सुखांत यह प्रेमकहानी
लाये दिवाली फिर जीवन में ,
प्रेम दीप ,अपनी झिलमिल से
अगर प्यार करना है तुमको ,
प्यार करो तुम स्टाइल से
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
,
आज तुम्हारा मृत्यु पर्व माँ ,जब तुमने जग छोड़ा था
चली गयी तुम,रोता और विलखता ये दिल तोडा था
तुम बिन कितना सूनापन सा व्याप्त हो गया जीवन में
जब भी याद तुम्हारी आती ,आँखें भरती अंसुवन में
तुम थी तो घर में रौनक थी ,हलचल थी,उजियारा था
हम पर ममता की छाया थी ,संबल और सहारा था
तेरे आँचल में खुशियां थी ,हम सब हँसते गाते थे
तेरे ही निर्देश हमेशा , सही दिशा दिखलाते थे
तूने हरदम हमें संभाला ,सुख दुःख में ढाढ़स बाँधा
रहे संतुलित ,रखी सुरक्षित,परिवार की मर्यादा
माता ,तेरी आशीषें ही ,जीवन सफल बनायेंगी
दुर्गम पथ कोआलोकित कर राह हमें दिखलायेगी
तेरे आदर्शों पर चल कर ,हम जीवन निर्वाह करें
हिलमिल कर परिवार हमेशा ,सुखी रहे,यह चाह करें
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
रविवार, 8 दिसंबर 2019
सारा जीवन सात दिनों का ,पहले दो दिन बचपन के
तीन दिवस ऊर्जा परिपूरित ,कहलाते है यौवन के
छटे दिवस तक ,ढीले पड़ते ,पुर्जे सारे इस तन के
आये बुढ़ापा दिवस सातवें ,हम तुम पड़ते ठन्डे है
ये जीवन का सन्डे है
संडे का दिन छुट्टी का दिन ,काम नहीं आराम करो
बहुत थक लिये ,पिछले छह दिन ,अब थोड़ा विश्राम करो
सुबह देर तक सोवो प्रेम से और रंगीली शाम करो
अपनी सब चिंताएं छोडो आया असली 'फन डे ' है
ये जीवन का सन्डे है
हमें याद आते है वो दिन ,जब हम नौकरी करते थे
सन्डे की छुट्टी के खातिर ,कितना अधिक तरसते थे
कई काम सन्डे को, करने खातिर छोड़ा करते थे
काम पेन्डिंग सब पूरे कर ,हमने गाड़े झंडे है
ये जीवन का सन्डे है
यह तो एक आराम पर्व है हमको ,यूं न बिताना है
जितना भी बन सके ,दीन दुखियों को सुख पहुँचाना है
बहुत कमाया धन जीवन में ,अब तो पुण्य कमाना है
मन को रमा ,राम में ,तजने सब हथकंडे है
ये जीवन का सन्डे है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
शनिवार, 7 दिसंबर 2019
१
आप भी क्रुद्ध है
सामनेवाला भी क्रुद्ध है
हो रहा वाकयुद्ध है
कुछ गालिया वो दे रहा है
कुछ गलियां आप दे रहे है
न लट्ठ चले न बंदूक दगी
न खून बहा न चोंट लगी
पर दोनों ही पक्षों के मन का ,
निकल गया गुबार
बस की थोड़ी बकझक है
ये लड़ाई कितनी अहिंसक है
२
ये गाली देने की विधा भी निराली है
किसी को जानवर शेर कहो तो तारीफ़ ,
और गधा कहो तो गाली है
हमारी समझ में ये नहीं आता है
लक्ष्मीजी जिस पर सवारी करती है ,
किसी को उनका वाहन उल्लू बतलाना
गाली क्यों कहलाता है
३
भावनाओं का गुबार छटता है ,
आँखों के रास्ते ,
जब गम सारे आंसूं बन बह जाते है
और दुःख होते है सफा
इसी तरह मन में गुबार गुस्से का ,,
अगर तुमको है हटाना ,
तो उसे दो जी भर कर गालियां ,
जिससे तुम हो ख़फ़ा
४
शराफ़त के चिंदे चिंदे करनेवाली ,
उनकी जुबान
जब उगलने लगती है आग
तो समझलो बंदा,
अपनी असलियत पर आ गया है
उसके मुंह पर ,
गालियों का गुबार छा गया है
५
हमारे गाँवों की तहजीब में भी ,
इतनी बस गयी है ये गालियां
कि शादियों में भी समधियों को ,
गाकर सुनाई जाती है गालियां
६
ये जरूरी नहीं कि गालियां ,
चिल्ला कर ही दी जाये ,
नजाकत और नफासत से भी
गाली देने का है तरीका
'लुच्चा कहीं का '
७
एक प्रश्न बार बार मेरे जहन में मंडराता है
मेरी समझ में नहीं आता है
साला हो साली
कैसे बन गए गाली
ये तो बड़ा मनभावना नाता है
फिर गाली क्यों कहलाता है
ये और ऐसे ही कुछ शब्द ,
हो गए इतने आम है
कि बन गए तकियाकलाम है
हम सुनते रहते है लोग खुद ,
खुद को ही गाली दिया करते है ऐसे
कि यार हम साले भी बेवकूफ है कैसे?
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019
कल रात मेरे साथ एक घटना घटी
आपको लगेगी थोड़ी अटपटी
पर ये सच है श्रीमान
कि कल मेरे सपने में आये थे भगवान
और बोले थे 'वत्स
अब तो जीवन कट रहा होगा मस्त
क्योंकि तुम अब हो गये हो रिटायर
बंद हो गया रोज रोज दफ्तर का चक्कर
न काम न धाम
दिन भर आराम ही आराम
जब इच्छा हो ,पत्नी से चाय बनवालो
थोड़ी सी रिकवेस्ट करो ,तो पकोड़े तलवालो
न फाइलों में सर खपाना न बॉस की चमचागिरी
आजकल तो है एकदम फ्री
न कोई चिंता न कोई टेंशन
और फिर अच्छीखासी पेंशन
इतने बरसों बाद
अब तो कभी कभी मुझको भी कर लेते हो तुम याद
मैं इधर से गुजर रहा था
रिटायर लोगों का सेम्पल सर्वे चल रहा था
तुम चैन की नींद लेते हुए नज़र आये
मैंने सोचा चलो शुरुवात तुमसे ही की जाए
तो बताओ कैसा लग रहा है रिटायरमेंट के बाद
अब तो हो बिलकुल आज़ाद
मैं बोलै भगवन
रिटायरमेंट के एक दो महीने बाद तक तो
मैं रहा काफी प्रसन्न
मैं फुर्सत के पूरे मज़े ले रहा था
बीबी भी खुश थी, मैं उसे पूरा टाइम दे रहा था
पर बाद में तन्हाई काटने लगी
प्यार करनेवाली पत्नी भी डाटने लगी
दिन भर घर में निठल्ले से पड़े रहते हो
हमेशा मेरे सर पर चढ़े रहते हो
तुम्हारी जी हजूरी करते करते मैं आगयी हूँ तंग
न सखियों संग गपशप का टाइम और न सत्संग
हमेशा खुद में ही रखते हो उलझा कर
मुझे समझ रखा है अपनी नौकर
उधर बहू बेटों की भी फ्रीडम
लगता था उन्हें कि जैसे हो गयी हो ख़तम
एक दिन बेटा बोला समझाते समझाते
आप दिन भ घर में घुसे हुए बोअर नहीं हो जाते
रोज सुबह उठ कर थोड़ा टहल लिया करो
बच्चों को स्कूल बस तक छोड़ दिया करो
लौटते समय डेरी से दूध भी ला सकते हो
शाम को बच्चों को झूला भी झुलवा सकते हो
नहीं तो बैठे बैठे ,आपकी हड्डियां जायेगी जकड
बीमारियां लेगी पकड़ मोटापा जाएगा बढ़
तो आजकल पोते पोतियों की तीमारदारी में लगा रहता हूँ
नहीं तो बीबी से आलसी और निठल्ले के ताने सहता हूँ
वैसे भी बढ़ती हुई उम्र के साथ शरीर क्षीण हो गया है
चेहरा कांतिहीन हो गया है
दिखता कम है ,नज़र धुँधली है
दो दांत इम्प्लांट हुए है और दो पर केप चढ़ी है
थोड़ा सा चलो तो सांस फूलती है
याद कमजोर हो गयी है ,हर बात भूलती है
डाइबिटीज है ,खाने पर नियंत्रण है
फिर भी मीठा खाने को मचलता मन है
घुटनो में दर्द है ,चल नहीं पाते
नींद नहीं आती ,जग कर कटती है रातें
अपनों के प्यार को आत्मा तरसती है
और प्रभु जी आप कह रहे हो कि मस्ती है
भगवन बोले वत्स ,लगता है तुम हो परेशान
तुम चाहो तो करवा दें तुम्हे जल्दी बुलवाने का इंतजाम
हम घबरा गए और बोले नहीं नहीं प्रभु ,
ऐसी परेशानी की कोई बात नहीं है
अब तो ये सब अच्छा लगने लगा है ,
अभी आपके यहाँ जल्दी आने के हालात नहीं है
ये शरीर है ,थोड़ी बहुत उंच नीच तो रहती है चलती
मैंने अपने हाल को बढ़ा चढ़ा कर,
बुरा बताने की, की गलती
मैंने सोचा था आपने दर्शन दिए है ,
तो आशीर्वाद देकर थोड़ा अहसान कर दोगे
अमृत का कोई छींटा छिटक ,
मुझे फिर से जवान कर दोगे
पर आप तो उलटे जल्दी बुलाने की बात करने लगे
हम तो आपके दर्शन कर के मुफ्त ही गए ठगे
अभी इतनी जल्दी थोड़े ही मरना है
अभी तो पोते पोती नातिन की शादी करना है
आपने ये जो इतनी सुन्दर दुनिया बनाई है ,
इसे भी ठीक से देखने की हसरत है
इसलिए आपने जो उम्र लिखी है ,
उससे भी ज्यादा आठ दस वर्षों की जरुरत है
इसलिए हे भगवन
आपसे है नम्र निवेदन
आपने है दिए दर्शन तो करदो बस इतना उपकार
मेरी आयु बढ़वा दो बस एडिशनल दस साल
प्रभु हँसे और बोले मुर्ख आदमी
बस तुझमे है यही कमी
मोह में बंधा हुआ है
लालच में अँधा हुआ है
कब छूटेगा तुझसे ये बंधन
जरा सोच ,आज भी जीर्णशीर्ण हो रहा है तेरा तन
दिनबदिन तेरी हालत होती जायेगी बदतर
तेरा शरीर होता जाएगा जर्जर
अभी तो तू थोड़ा खुद को संभल भी लेता है ,
बाद में पूर्ण रूप से हो जाएगा दूसरो पर निर्भर
तू बहुत ही बदहाल हो जाएगा
परिवार पर बोझा और भार हो जाएगा
तू लम्बी उम्र तो जियेगा पर दुःख भोगेगा
मैंने ज्यादा लम्बी उम्र क्यों मांगी ,खुद को कोसेगा
वृद्धावस्था की लम्बी उम्र के हर दिन तुझे पश्चाताप होगा
मेरा तेरी उम्र में इजाफा करना ,तेरे लिए अभिशाप होगा
इसलिए हे मानव ,तू मत ला मन में ,
बहुत ज्यादा लम्बा जीने की कल्पना भी
अगर दुर्गति से बचना है तो ,
विधाता ने जो दी है जिंदगी ,जैसी लिखी है ,वैसी जी
राम में मन रमा ,एक वो ही सच्चा है
आदमी चलते फिरते चला जाए ,यही सबसे अच्छा है
मदन मोहन बाहेती 'घोटू ';
गुरुवार, 5 दिसंबर 2019
हमे पता तुमने कितना कर्तव्य निभाया
अपनाया ना किन्तु शुक्र है ,ना ठुकराया
पत्नी डर से ,पुत्र धर्म तुम निभा न पाये
पूर्ण आस्था से पर पति का धर्म निभाये
किंन्तु पिता मै ,तुम मेरी आँखों के तारे
जिसको ले, मैंने पाले थे , सपने सारे
हंसी ख़ुशी से कटे बुढ़ापा ,आस कहीं थी
टूट गए सब सपने ,शायद नियति यही थी
मैंने ऊँगली पकड़ सिखाया ,तुमको चलना
मुझे याद है तुम्हारी जिद और मचलना
ऐसे मचले देख एक ललना का आनन
किया इशारों पर ऊँगली के उसके नर्तन
भुला दिए माँ बाप जिन्होंने प्यार लुटाया
पा पत्नी का साथ ,अलग संसार बसाया
निज जनकों से तुमने बना रखी दूरी थी
तुम कर्तव्य निभा ना पाए ,मजबूरी थी
हम रिश्तों का मोह नहीं अपना खो सकते
और न ही हम तुम जैसे निष्ठुर हो सकते
हुआ विछोह ,पुत्र का मोह ,हमें ये गम था
त्योहारों पर छूटे पैर ,यही क्या कम था
हम भोले है ,हमने सारा प्यार दे दिया
तुम्हे वसीयत में सारा अधिकार दे दिया
घोटू
लाभ हानि देखते हर काम में ,लोग है कितने सयाने हो गए
दिख न पाता सूर्य सुबहोशाम का ,काम में इतने दीवाने हो गए
प्रेमपत्रों का जमाना लद गया , शुरू अब ई मेल आने हो गए
मैं और मेरी दुनिया ही संसार है ,बाकी सब रिश्ते अजाने हो गए
गूंथें थे ,शोभित गले का हार थे ,ऐसे बिखरे दाने दाने हो गए
शहर में दो रूम का एक फ्लेट है ,गाँव के बंगले बिराने हो गए
चाचा मामा ताऊ सब अंकल बने ,बाकी सब रिश्ते पुराने हो गए
नहीं फुर्सत मिलने की ,माँ बाप से ,सैंकड़ों ही अब बहाने हो गए
'घोटू 'कुछ अनजान तो अपने बने ,और अपने अब बेगाने हो गए
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
मंगलवार, 26 नवंबर 2019
प्यार दुनिया आप पर बरसायेगी ,
आप ढंग से मुस्कराना सीख लो
कुंडिया हर द्वार की खुल जायेगी ,
आप ढंग से ,खटखटाना सीख लो
बहुत गहरा होता है दिल का कुवा ,
जिसमे रहता प्यार का अमृत भरा ,
उम्र भर तुम प्यार का अमृत पियो ,
कुवे में बस उतर जाना सीख लो
सूजी आटे की है फुलकी ,खोखली ,
खट्टा मीठा प्यार, पानी चटपटा ,
स्वाद इनका उठा पाओगे तभी ,
फुलकी में भर ,गटक जाना सीखलो
टूटता दिल तो निकलती आह है
अगर सच्ची चाह है तो राह है ,
लगाना दिल का नहीं है दिल्लगी ,
आप ढंग से ,दिल लगाना सीख लो
कोई लड़की अगर दिल को भा गयी
प्यार की बदली हृदय पर छा गयी,
नहीं आसां झट पटाना लड़कियां ,
पहले थोड़ा छटपटाना सीख लो
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
सीढ़ियां हमसे चढ़ी जाती नहीं ,
शौक़ है जन्नत की रौनक देखलें
आँखें धुंधली ,मगर है हसरत यही ,
हुस्न हूरों का हम भरसक देखलें
आरजू ये मन की बढ़ती जा रही ,
ये भी ले ले ,वो भी ,कुछ छोड़े नहीं ,
स्वाद के मारे है हरदम चाहते ,
सभी अच्छी चीजों को चख देखलें
पेड़ ,पौधे ,पहाड़ नदियां ,वादियां ,
बड़ी तबियत से रचे भगवान ने ,
बहुत ही है खूबसूरत ये जहाँ ,
सभी को हम फेंक नज़रें देखलें
दुखी ,बेबस ,ग़म भरा संसार है ,
जिंदगी में कितनो की अन्धकार है ,
जगमगा रोशन करें हर जिंदगी ,
प्यार का दीपक जला कर देखलें
सब में बांटे प्यार ,करके दोस्ती ,
जींतलें दिल सबका सदव्यवहार से ,
सभी पर हम छाप अपनी छोड़ दें ,
सभी को अपना बना कर देखलें
हम कभी भी अहम् में डूबे नहीं ,
सादगी से जियें ,हँसते खेलते ,
दिल किसीका कभी भी तोड़े नहीं,
सभी को दिल से लगा कर देखलें
मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
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OBO -छंद ज्ञान / गजल ज्ञान - उर्दू से हिन्दी का शब्दकोश *http://shabdvyuh.com/* ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) - 2 गीतिका छंद वीर छंद या आल्हा छंद 'मत्त सवैया' या 'राधेश्यामी छंद' :एक ...13 वर्ष पहले
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यार की आँखों में....... - मैं उन्हें चाँद दिखाता हूँ उन्हे दिखाई नही देता। मैं उन्हें तारें दिखाता हूँ उन्हें तारा नही दिखता। या खुदा! कहीं मेरे यार की आँखों में मोतियाबिंद...13 वर्ष पहले
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आज का चिंतन - अक्सर मैं ऐसे बच्चे जो मुझे अपना साथ दे सकते हैं, के साथ हंसी-मजाक करता हूँ. जब तक एक इंसान अपने अन्दर के बच्चे को बचाए रख सकता है तभी तक जीवन उस अंधकारमय...13 वर्ष पहले
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Pujya Tapaswi Sri Jagjivanjee Maharaj Chakchu Chikitsalaya, Petarbar - Pujya Tapaswi Sri Jagjivanjee Maharaj Chakchu Chikitsalaya, Petarbar is a Charitable Eye Hospital which today sets an example of a selfless service to the...14 वर्ष पहले
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क्राँति का आवाहन - न लिखो कामिनी कवितायें, न प्रेयसि का श्रृंगार मित्र। कुछ दिन तो प्यार यार भूलो, अब लिखो देश से प्यार मित्र। ……… अब बातें हो तूफानों की, उम्मीद करें परिवर्तन ...14 वर्ष पहले
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कल रात तुम्हारी याद - कल रात तुम्हारी याद को हम चाह के भी सुला न पाये रात के पहले पहर ही सुधि तुम्हारी घिर कर आई अहसास मुझको कुछ यूँ हुआ पास जैसे तुम हो खड़े व्याकुल हुआ कुछ मन...14 वर्ष पहले
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HAPPY NEW YEAR 2012 - *2012* *नव वर्ष की शुभकामना सहित:-* *हर एक की जिंदगी में बहुत उतार चढाव होता रहता है।* *पर हमारा यही उतार चढाव हमें नया मार्ग दिखलाता है।* *हर जोखिम से ...14 वर्ष पहले
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"भइया अपने गाँव में" -- (बुन्देली काव्य-संग्रह) -- पं० बाबूलाल द्विवेदी - We're sorry, your browser doesn't support IFrames. You can still <a href="http://free.yudu.com/item/details/438003/-----------------------------------------...14 वर्ष पहले
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अब बक्श दे मैं मर मुकी - चरागों से जली शाम ऐ , मुझे न जला तू और भी, मेरा घर जला जला सा है,मेरा तन बदन न जला अभी, मैंने संजो रखे हैं बहुत से राख के ढेर दिल मैं कहीं, सुलग सुलग के आय...14 वर्ष पहले
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अपनी भाषाएँ - *जैसे लोग नहाते समय आमतौर पर कपड़े उतार देते हैं वैसे ही गुस्से में लोग अपने विवेक और तर्क बुद्धि को किनारे कर देते हैं। कुछ लोगों का तो गुस्सा ही तर्क...14 वर्ष पहले
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दरिन्दे - बारूद की गन्ध फैली है, माहौल है धुआँ-धुआँ कपड़ों के चीथड़े, माँस के लोथड़े फैले हैं यहाँ-वहाँ। ये छोटा चप्पल किसी मासूम का पड़ा है यहाँ ढूँढो शयद वह ज़िन...16 वर्ष पहले
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