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सोमवार, 9 अक्टूबर 2023

मुझे स्वर्ग से भी बढ़कर लगता है प्यारा

मेरी जन्म भूमि आगर ने मुझे संवारा 


मैंने जो भी पाई सफलता है जीवन में 

बोया उसका बीज गया था इस आंगन में


याद आता है मिट्टी से वह पुता हुआ घर

सीखा चलना मां की उंगली पकड़ पकड़ कर 


सीखा था अ से अनार और क से ककड़ी

पूरी बारह खड़ी, याद थी मैंने कर ली 


रटे एक से चालीस तक के सभी पहाड़े

और छड़ी से मिली मास्टर जी की मारे 


शैतानी का दंड , हमें मुर्गा बनवाना 

वो गिल्ली,वो डंडा और वो पतंग उड़ाना


 वो स्लेटें,वो झोला और टाट की पट्टी 

वह पल-पल में हुई दोस्ती, पल में कट्टी 


वह तालाब में कपड़े धोना और नहाना

रामआसरे की सेव,चौधरी रबड़ी खाना 


वह प्यारे स्वादिष्ट सिंघाड़े ,काले काले 

वो खिरनी, जामुन ,आम मीठे रस वाले


वो शहर का हाई स्कूल दरबार की कोठी

दादी हाथों पकी जुवारी की वह रोटी 


भाई बहन के संग हुई जो पल-पल मस्ती

होती थी परिवार ,गांव की पूरी बस्ती


सोमवार को बैजनाथ , दर्शन को जाना

रास्ते में झाड़ी से तोड़ करौंदे खाना 


दशहरे को आते जब रावण का वध कर

पैर बुजुर्गों के छूते थे, घर-घर जाकर 


मां का लाड़ दुलार और वह पालन पोषण

मिली पिताजी की शिक्षाएं और अनुशासन


रोज शाम को छत पर जाकर गिरना तारे

क्या क्या करें याद हम ,क्या क्या और बिसारे 


जब भी आती याद,बहुत विव्हल होता मन

आंखों आगे , नाचा करता ,मेरा बचपन 


यहां की माटी लाल, मेरा तो है यह चंदन 

मातृभूमि तुझको मेरा शत शत अभिनंदन


मदन मोहन बाहेती घोटू 


रविवार, 8 अक्टूबर 2023

जमाना बदल गया है

मेरा देश कभी सोने की चिड़िया हुआ करता था ,
पर देखो परिस्थितियों कितनी बदल गई है आज सोना आसमान को छू रहा है , और 
आसमान में चिड़िया नजर आती नहीं है

मेरे देश की धरती जो कभी सोना थी  
उगलती 
आज उन खेतों में पराली है जलती

कभी हरियाली से भरे हुए जंगल हुआ करते थे ,
आज जाने कहां खो गए हैं 
जिधर देखो उधर कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं 

कभी मेरे देश में बहती थी दूध दही की नदियां खूब 
और आजकल प्लास्टिक की पैकिंग में मिल रहा है दूध 

पश्चिम की हवाओं ने पूरब की लाली को ऐसा बुझाया है
कि मेरी देश की संस्कृति और संस्कारों को मिटाया है
अब जन्म दिवस की तिथि ऐसे मनाई जाती है 
दीप जलाये नहीं जाते,
 मोमबत्ती बुझाई जाती है 

पहले जहां पग पग रोटी पग पग नीर
हुआ करता था 
अब नीर प्लास्टिक की बोतल में दिख रहा है ,
और हर तरफ ढाबे खुल गए हैं जहां रोटी और खाना बिक रहा है 

पुराने ऋषि मुनियों के गुरुकुल 
हो गए हैं गुल 
और जगह-जगह कोचिंग क्लासेस गई है खुल 

अतिथि देवो भव की परंपरा अब सिर्फ पांच सितारा होटल में पाई जाती है 
अब खुशी के मौका पर गुड़ और पताशे नहीं बंटते ,केक खाई जाती है 

शादी के पहले साथ रहने का चलन चल गया है 
पता नहीं हम बदले हैं या जमाना बदल गया है

मदन मोहन बाहेती घोटू 

राधा तू बड़भागिनी, कौन तपस्या कीन

तीन लोक तारण तरण

है तेरे आधीन 


राधे राधे तेरे नाम ने, सबके कारज साधे

बोलो राधे राधे राधे ,बोलो राधे राधे राधे 


राधे तू बरसाने वाली

सब पर सुख सरसाने वाली 

तेरी सूरत प्यारी प्यारी 

कान्हा के मन भाने वाली 

अपनी प्यारी युगलछवि के

तू दर्शन करवा दे 

बोलो राधे राधे राधे ,बोलो राधे राधे राधे


मेरे प्यारे कृष्ण मुरारी 

मेरे गोवर्धन गिरधारी 

ऐसी प्रीत लगाई तुझ पर

वो तो जाएं वारी वारी

मुग्ध हो गए,तेरे रूप ने

रक्खा उनका बांधे 

बोलो राधे राधे राधे बोलो राधे राधे राधे 


कान्हा बंसी मधुर बजाते 

कान्हा तुझ पर प्यार लुटाते 

जमुना तट पर, बंसी वट पर 

तुझ संग रास रचाते

एक झलक उस महारास की

 हमको भी दिखला दे 

बोलो राधे राधे राधे ,बोलो राधे राधे राधे


 कान्हा ऐसे भये दीवाने 

प्रीत तेरे संग जोड़ी 

राधे कृष्णा , राधे कृष्णा

अमर हो गई जोड़ी 

हम भक्तों पर भी थोड़ी सी

किरपा तू बरसा दे 

बोलो राधे राधे राधे

बोलो राधे राधे राधे


मदन मोहन बाहेती घोटू 

शनिवार, 30 सितंबर 2023

आई दिवाली रे

दीप चमकते ,जगमग जगमग 
हर घर चमके ,जगमग जगमग 
सबके चेहरा है, जगमग जगमग 
साथ खुशियां मनाये परिवार रे 
आया दीपावली त्योहार रे 

हर दीपक में भरा प्रेम रस 
बाती ज्योतिर्मय करती जग 
पूनम सी हो गई अमावस 
दूर हुआ अंधकार रे 
आया दीपावली त्यौहार रे

चौदह वर्षों वन में रहकर 
आज अयोध्या आए रघुवर 
दीप जलाए ,सबने घर-घर 
करने प्रभु जी का सत्कार रे 
आया दीपावली त्यौहार रे

श्री लक्ष्मी गणेश का पूजन 
बड़े प्यार से करता हर जन 
घर-घर बनते छप्पन व्यंजन 
सब लोग लुटाते प्यार रे
आया दीपावली त्यौहार रे

मदन मोहन बाहेती घोटू 

सोमवार, 25 सितंबर 2023

चिर यौवन 


बचपन ,यौवन,वृद्धावस्था ,

ये जीवन का क्रम सदा रहे 

पर हर कोई करता प्रयास,

वह जब तक जिये ,जवां रहे 

खा लेने भर से च्यवनप्राश

हर दम ना टिकता है यौवन 

या शिलाजीत का सेवन कर

होता मजबूत शिला सा तन 

क्षरण नियम है प्रकृति का ,

होती है उम्र जब साठ पार 

आता है बुढ़ापा हर तन पर ,

दस्तक देता है बार-बार 

पर वृद्धावस्था से तुमको 

जो टक्कर लेकर जीना है 

हंसते-हंसते मरते दम तक

 यौवन का अमृत पीना है 

तो अपना हृदय जवान रखो 

तुम अपनी सोच जवान रखो 

मत देखो श्वेत केश ,मन में,

तुम यौवन का तूफान रखो 

मन में फुर्तीले होने से ,

फुर्तीला हो जाता तन है 

डर दूर बुढ़ापा भग जाता, 

कायम रहता चिर यौवन है 

रहते उमंग और जोश भरे ,

जो खुश रहते हंसते गाते 

मन से जवान वो रहते हैं 

चिर युवा वही है कहलाते


मदन मोहन बाहेती घोटू

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