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रविवार, 9 अगस्त 2020

तुम मेरी प्रियतम

तुम पूनम के चंदा जैसी ,अमृत बरसाती चंद्र किरण
प्राची की लाली से प्रकटी ,सूरज की रश्मि, प्रथम प्रथम
तुम्हारा प्रेम प्रकाश पुंज ,आलोकित करता है जीवन
मनभावन और मनोहर तुम ,सुन्दर ,सुंदरतर ,सुन्दरतम

है गाल गुलाब पंखुड़ियों से ,रस भरे अधर, रक्तिम रक्तिम
है कमलकली अधखुले नयन ,मदमाता सा चम्पई बदन
है पूरा तन रेशम रेशम ,और महक रहा चन्दन चन्दन
हो रही पल्ल्वित पुष्पों सी ,कोमल ,कोमलतर ,कोमलतम

 उर में है युगल कलश अमृत ,संचित पूँजी यौवन धन की
पतली डाली,कमनीय कमर,निखरी निखरी छवि है तन की
हिरणी सी चपल चाल ,मनहर ,और चंचल चंचल सी चितवन
मन के कण कण में बसी हुई ,तुम मेरी प्रिय ,प्रियतर,प्रियतम

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 

शनिवार, 8 अगस्त 2020

मंहगा सोना

कमजोरी हर नारी मन की
यह चाहत स्वर्णाभूषण की
पहनो मुख पर आती रौनक
बढ़ती उसकी जा रही चमक
है भाव रोज ऊपर  चढ़ता
सोना कितना  मंहगा पड़ता

स्कूल के दिन है याद हमें
शैतानी वाला स्वाद हमें
कक्षा  में बोअर होते थे
पिछली  बेंचों पर सोते थे
पकडे ,मुर्गा बनना पड़ता
सोना कितना  मंहगा पड़ता

हम दफ्तर में थे थक जाते  
लोकल ट्रेनों से घर जाते
थक कर झपकी ले लेते हम
छूटा करता था स्टेशन
फिर लौट हमें आना पड़ता
सोना कितना मंहगा पड़ता

निज देश प्रेम करने जागृत
एक सेमीनार था आयोजित
 मंच  पर बैठे थे मंत्री जी
लग गयी आँख ,आयी झपकी
पेपर में फोटू जब छपता
सोना कितना मंहगा पड़ता

कर बचत  गरीब कामवाली
ले आयी सोने की बाली  
पहनी जिस दिन था त्योंहार
ले गए छीन कर झपटमार
कट गए कान ,सिलना पड़ता
सोना कितना मंहगा पड़ता

है चार माह भगवन सोते
शुभ कार्य नहीं कोई होते
मुहूरत अटका देता  रोडे
तड़फा करते ,प्रेमी जोड़े
जब इन्तजार करना पड़ता
सोना कितना मंहगा पड़ता

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
कम्प्यूटर हृदया प्रिया से  

हे कम्यूटर ह्रदय प्रीमिका ,सच्चे दिल से तुम्हे शुक्रिया
मुझे दोस्तों से 'कट 'करके अपने दिल में 'पेस्ट 'कर लिया
नम्र निवेदन इतना ,मुझको ,'शेयर 'फॉरवर्ड 'मत करना
अपने दिल की 'मेमोरी 'में ,'सेव 'इसे तुम कर के रखना

घोटू 
कोरोना काल -बुरा हाल
         दो छक्के

पत्नीजी थी डाटती ,जोर जोर चिल्लाय
पतिदेव का कर रही थी वो 'भेजा फ्राय '
थी वो 'भेजा फ़्राय' ,पति चुप ,डरता डरता
बेचारा कुछ करता भी ,तो वो क्या करता
बोला चुप हो ,बंद करो ,चिल्लाना ,रोना
'मास्क 'बाँध लो,नहीं कहीं हो जाय कोरोना

कोरोना के  कहर  से , घर घर फैला क्लेश
कम्पित है और दुखी है ,दुनिया का हर देश
दुनिया का हर देश , दुष्ट है यह महामारी
 मंदिर बनता  राम ,हरो अब  विपदा भारी
जैसे रावण  मारा , इसको  भी मरवा  दो
जल्दी इसका 'राम नाम सत्य 'तुम करवा दो

घोटू 

गुरुवार, 6 अगस्त 2020

रोमांटिक ओल्ड कपल
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खुश रह मस्ती से काट रहे ,ढलते जीवन का एक एक पल
हम है रोमांटिक ओल्ड कपल

ऊँगली में फंसा उंगलिया हम ,घूमा करते जब था यौवन
अब बने सहारा एक दूजे का ,ऊँगली पकड़ चल रहे हम
रजनी से काले केशों में ,सूरज सी  श्वेत चमक  आयी
है नयन कमल से खिले हुए ,पर पखुड़ी पखुड़ी मुरझाई
जीवन सरिता कल कल बहती ,मालूम नहीं क्या होगा कल
खुश हो मस्ती में काट रहे ,ढलते जीवन का एक एक पल
हम है रोमांटिक ओल्ड कपल

हममें आपस में तालमेल  ,मिलते जुलते विचार सदा
हम जिम्मेदारी मुक्त हुए , सबसे अच्छा व्यवहार सदा
सन्तुष्ट सरल अब जीवन है ,ना बची कोई फरमाइश है
जब तक जिन्दा है साथ रहे ,बस इतनी सी ही ख्वाइश है
यह जीवन सफर काट दें हम बन एक दूसरे का संबल
खुश रह मस्ती में काट रहे ,ढलते जीवन का एक एकपल
हम है रोमांटिक ओल्ड कपल

बातें एक दूजे के मन की ,हम समझा करते बिन बोले
कोई दुराव छिपाव  नहीं , है खुली किताब,बहुत भोले  
होती रहती है उंच नीच , सुख दुःख आते जाते रहते
लेकिन मन में उत्साह लिए ,हम हँसते हँसते ,सब सहते
है अब भी वही दिवानापन ,हम एक दूसरे प्रति पागल
खुश रह मस्ती में काट रहे ,ढलते जीवन का एक एक पल
हम है रोमांटिक ओल्ड कपल

मदन मोहन बाहेती ;घोटू ;

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