पते की बात
तरक्की
कोई भी हो उपकरण ,मधुमख्खियों सा ,
फूलों से ला शहद दे सकता नहीं
कोई भी हो यंत्र कोरी घांस खाकर ,
गाय जैसा दूध दे सकता नहीं
भले कितनी ही तरक्की कर रहा ,
आजकल ये दिनबदिन विज्ञान है
मगर अब तक किसी मुर्दा जिस्म में ,
डाल वो पाया न फिर से जान है
घोटू
कोई न कोई तो बात चलाती है
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किसी को चलाती है ख़ुशी , किसी को सब्र चलाता है ,किसी को ज़िद चलाती है
पी कर के कोई ईंधन जैसे सब चल पड़ते हैं
मुझे मेरा ग़मे-यार चलाता है
कहाँ झुकता...
1 घंटे पहले