पते की बात
तरक्की
कोई भी हो उपकरण ,मधुमख्खियों सा ,
फूलों से ला शहद दे सकता नहीं
कोई भी हो यंत्र कोरी घांस खाकर ,
गाय जैसा दूध दे सकता नहीं
भले कितनी ही तरक्की कर रहा ,
आजकल ये दिनबदिन विज्ञान है
मगर अब तक किसी मुर्दा जिस्म में ,
डाल वो पाया न फिर से जान है
घोटू
806. क्षणभंगुर जीवन
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क्षणभंगुर जीवन
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कितने बहाने
कितने दलील
सब फ़िज़ूल
ठगाया जीवन।
सोचा समझा
सब बिखरा
आघात मिला
व्यर्थ जीवन।
उपाय नहीं
समझौता सही
नासमझ नहीं
यही जीवन। ...
1 दिन पहले