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बुधवार, 8 जुलाई 2026

मैंने तो मांगी थी तुमसे 
सिर्फ अंजुली एक प्यार की,
 किंतु कृपा की तुमने ऐसी,
 सागर भर कर प्यार दे दिया 

मैं तुम्हारी प्रेम दृष्टि की,
 एक झलक पाने आतुर था 
लेकिन नयन मिला कर तुमने 
सपनों का संसार दे दिया 

बहुत तड़फ थी, उमस भरे दिन,
 लू के झोंके रहे थे बरस 
 मैंने तो तुमसे मांगी थी 
दे दो बस थोड़ी सी ठंडक

 पर बादल बन, तुमने साजन
 प्रेम नीर ऐसा बरसाया 
मेरे तन के पौर पौर में,
एक शीतल संचार दे दिया

 मैंने तो मांगी थी तुमसे,
सिर्फ अंजुली एक प्यार की 
किन्तु कृपा की तुमने ऐसी,
सागर भर कर प्यार दे दिया 

प्रबल शीत वाला मौसम था
मैं ठिठुरन से तड़फ रहा था 
मैंने तुमसे तन ढकने को 
माँगा था आँचल का साया 

दूर होगयी सारी तड़फन 
गरम हो गया तन का कण कण 
बदली मेरी सारी दुनिया 
जबसे साथ तुम्हारा पाया 

इतनी मेहरबान हुई तुम 
अपने श्वासों की ऊष्मा से 
देने तपन ठिठुरते दिल को
बाहुपाश का हार दे दिया 

मैने तो मांगी थी तुमसे 
सिर्फ अंजुली एक प्यार की 
किन्तु कृपा की तुमने ऐसी 
सागर भर कर प्यार दे दिया 

मदन मोहन बाहेती घोटू 





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