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गुरुवार, 31 जुलाई 2025
हैप्पीनेस का सॉन्ग
हैप्पी ,मै हैप्पी
हैप्पी , तू हैप्पी
हैप्पी हैप्पी हैप्पी हैप्पी ऑल
खुशी से खुश मै
खुशी से खुश तू
सारी दुनिया खुशी से मालामाल
हैप्पी मै हैप्पी
हैप्पी तू हैप्पी
हैप्पी हैप्पी हैप्पी आल
तो आओ खुशी से मनाएं मौज हम
डेली डेली डेली,रोज रोज हम
नाचे नाचे नाचे , गाएं गाएं गाएं
मर्जी का पीएं और मर्जी का खाएं
खुशियां मनायें पूरे साल
इधर तू हैप्पी, उधर मैं हैप्पी
हैप्पी हैप्पी हैप्पी हैप्पी आल
तुझे ना गम है ,मुझे ना गम है
इसलिए हैप्पी हैप्पी हरदम है
नहीं तू सॉरी, नहीं मैं सॉरी
ना कोई झगड़ा न मारा मारी
आपस में लुटाएं प्यार
इधर तू हैप्पी, इधर मैं हैप्पी
हैप्पी हैप्पी हैप्पी संसार
हैप्पी हैप्पी हैप्पी हैप्पी आल
कोई जो दुखी है,तो गम को मिटा दो
चेहरे पे उसके ,तुम मुस्कान ला दो
करोगे करम ये, धरम होगा हैप्पी
करोगे जो हैप्पी,रहोगे तुम हैप्पी
सारी दुनिया रहेगी खुशहाल
हैप्पी हैप्पी हैप्पी हैप्पी आल
मदन मोहन बाहेती घोटू
रविवार, 13 जुलाई 2025
जय जय लक्ष्मी महारानी
जय जय जय लक्ष्मी महारानी
जय जय लक्ष्मी महारानी
पूजा करते सभी तुम्हारी
महिमा जानी मानी
जय जय जय लक्ष्मी महारानी
ओम श्री महालक्ष्मैंये नमः
ओम श्री महालक्ष्मैये नमः
कमलासन पर तुम विराजती
जल बरसाते हाथी
अपने दोनों हाथों से तू
सब पर धन बरसाती
माते ,सब पर धन बरसाती
करती हो संपन्न हमें तुम
माता सुखी दाता
आशीर्वाद तुम्हारे पाने
हर कोई शीश नमाता
माते हर कोई शीश नमाता
तेरी कृपा चाहते हैं सब
रंक ,राजा और ज्ञानी
जय जय लक्ष्मी महारानी
जय जय लक्ष्मी महारानी
ओम श्री महालक्ष्मी नमः
ओम श्री महालक्ष्मी नमः
दिवाली पर दीप जला
सब करते तेरा वंदन
बड़े प्रेम से तुम्हें चढाते
हल्दी, रोली ,चंदन
माते हल्दी, रोली चंदन
उसे दिन तेरे साथ विराजा
करते गौरी नंदन
रिद्धि सिद्धि के दाता का
करते हैं सब अभिनंदन
माते करते सब अभिनंदन
माता सभी चाहते हरदम
तेरी मेहरबानी
जय जय लक्ष्मी महारानी
जय जय लक्ष्मी महारानी
दीपावली यह पर्व प्रेम का
जगमग ज्योति जलती
अंधकार को दूर भगा
तू जग को रोशन करती
माता जग को रोशन करती
हंसी खुशी सब रहे प्रेम से
जग में शांति छाये
सभी सुखी संपन्न रहे
और रोज दिवाली आए
माता रोज दिवाली आए
श्री गजानन और लक्ष्मी सब पर सुख बरसानी जय जय जय मां लक्ष्मी महारानी
जय जय मां जय लक्ष्मी महारानी
ओम श्री महालक्ष्मी में नमः
ओम श्री महालक्ष्मी नमः
मदन मोहन बाहेती घोटू
बुधवार, 9 जुलाई 2025
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बीज - मंत्र . - शब्द बीज हैं! बिखर जाते हैं, जिस माटी में , उगा देते हैं कुछ न कुछ. संवेदित, ऊष्मोर्जित रस पगा बीज कुलबुलाता फूट पड़ता , रचता नई सृष्टि के अंकन...1 वर्ष पहले
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मॉर्निंग वॉक- एक सुरक्षित भविष्य - जीवन में चलते चलते कभी कुछ दिखाई दे जाता है, जो अचानक दिमाग में एक बल्ब जला देता है , एक विचार कौंधता है, जो मन में कुनमुनाता रहता है, जब तक उसे अभिव्यक...6 वर्ष पहले
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2019 का वार्षिक अवलोकन (सत्ताईसवां) - डॉ. मोनिका शर्मा का ब्लॉग Search Results Web results परिसंवाद *आपसी रंजिशों से उपजी अमानवीयता चिंतनीय* अमानवीय सोच और क्रूरता की कोई हद नहीं बची ह...6 वर्ष पहले
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Kritidev to Unicode Converter - [image: Real Time Font Converter] DL-Manel-bold. (ã t,a udfk,a fnda,aâ) Unicode (යුනිකෝඩ්) ------------------------------ © 2011 Language Technology R...6 वर्ष पहले
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झाँसी की रानी पर आधारित "आल्हा छंद" - झाँसी की रानी पर आधारित 'अखंड भारत' पत्रिका के वर्तमान अंक में सम्मिलित मेरी एक रचना. हार्दिक आभार भाई अरविन्द योगी एवं सामोद भाई जी का. सन पैंतीस नवंबर उ...11 वर्ष पहले
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हम,तुम और गुलाब - आज फिर तुम्हारी पुरानी स्मृतियाँ झंकृत हो गई और इस बार कारण बना वह गुलाब का फूल जिसे मैंने दवा कर किताबों के दो पन्नों के भूल गया गया था और उसकी हर पंखुड़िय...11 वर्ष पहले
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गाँव का दर्द - गांव हुए हैं अब खंढहर से, लगते है भूल-भुलैया से। किसको अपना दर्द सुनाएँ, प्यासे मोर पप्या ? आंखो की नज़रों की सीमा तक, शहरों का ही मायाजाल है, न कहीं खे...11 वर्ष पहले
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रंग रंगीली होली आई. - [image: Friends18.com Orkut Scraps] रंग रंगीली होली आई.. रंग - रंगीली होली आई मस्तानों के दिल में छाई जब माह फागुन का आता हर घर में खुशियाली...11 वर्ष पहले
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भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?12 वर्ष पहले
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अन्त्याक्षरी - कभी सोचा नहीं था कि इसके बारे में कुछ लिखूँगी: बचपन में सबसे आमतौर पर खेला जाने वाला खेल जब लोग बहुत हों और उत्पात मचाना गैर मुनासिब। शायद यही वजह है कि इ...12 वर्ष पहले
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संघर्ष विराम का उल्लंघन - जम्मू,संघर्ष विराम का उल्लंघनकरते हुए पाकिस्तानी सेना ने रविवार को फिर से भारतीय सीमा चौकियों पर फायरिंग की। इस बार पाकिस्तान के निशाने पर जम्मू जिले के का...12 वर्ष पहले
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प्रतिभा बनाम शोहरत - “ हम होंगें कामयाब,हम होंगें कामयाब,एक दिन ......माँ द्वारा गाये जा रहे इस मधुर गीत से मेरे अन्तःकरण में नए उत्साह का स्पंदन हो रहा था .माँ मेरे माथे को...12 वर्ष पहले
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रश्मिरथी / द्वितीय सर्ग / भाग 7 ........दिनकर - 'हाय, कर्ण, तू क्यों जन्मा था? जन्मा तो क्यों वीर हुआ? कवच और कुण्डल-भूषित भी तेरा अधम शरीर हुआ? धँस जाये वह देश अतल में, गुण की जहाँ नहीं पहचान? जाति-गोत्...12 वर्ष पहले
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आवरण - जानती हूँ तुम्हारा दर्प तुम्हारे भीतर छुपा है. उस पर मैं परत-दर-परत चढाती रही हूँ प्रेम के आवरण जिन्हें ओढकर तुम प्रेम से भरे सभ्य और सौम्य हो जाते हो जब ...12 वर्ष पहले
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OBO -छंद ज्ञान / गजल ज्ञान - उर्दू से हिन्दी का शब्दकोश *http://shabdvyuh.com/* ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) - 2 गीतिका छंद वीर छंद या आल्हा छंद 'मत्त सवैया' या 'राधेश्यामी छंद' :एक ...13 वर्ष पहले
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इंतज़ार .. - सुरसा की बहन है इंतज़ार ... यह अनंत तक जाने वाली रेखा जैसी है जवानी जैसी ख्त्म होने वाली नहीं .. कहते हैं .. इंतज़ार की घड़ियाँ लम्बी होती हैं ख़त्म भ...13 वर्ष पहले
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यार की आँखों में....... - मैं उन्हें चाँद दिखाता हूँ उन्हे दिखाई नही देता। मैं उन्हें तारें दिखाता हूँ उन्हें तारा नही दिखता। या खुदा! कहीं मेरे यार की आँखों में मोतियाबिंद...13 वर्ष पहले
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आज का चिंतन - अक्सर मैं ऐसे बच्चे जो मुझे अपना साथ दे सकते हैं, के साथ हंसी-मजाक करता हूँ. जब तक एक इंसान अपने अन्दर के बच्चे को बचाए रख सकता है तभी तक जीवन उस अंधकारमय...13 वर्ष पहले
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Pujya Tapaswi Sri Jagjivanjee Maharaj Chakchu Chikitsalaya, Petarbar - Pujya Tapaswi Sri Jagjivanjee Maharaj Chakchu Chikitsalaya, Petarbar is a Charitable Eye Hospital which today sets an example of a selfless service to the...13 वर्ष पहले
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क्राँति का आवाहन - न लिखो कामिनी कवितायें, न प्रेयसि का श्रृंगार मित्र। कुछ दिन तो प्यार यार भूलो, अब लिखो देश से प्यार मित्र। ……… अब बातें हो तूफानों की, उम्मीद करें परिवर्तन ...13 वर्ष पहले
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कल रात तुम्हारी याद - कल रात तुम्हारी याद को हम चाह के भी सुला न पाये रात के पहले पहर ही सुधि तुम्हारी घिर कर आई अहसास मुझको कुछ यूँ हुआ पास जैसे तुम हो खड़े व्याकुल हुआ कुछ मन...13 वर्ष पहले
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HAPPY NEW YEAR 2012 - *2012* *नव वर्ष की शुभकामना सहित:-* *हर एक की जिंदगी में बहुत उतार चढाव होता रहता है।* *पर हमारा यही उतार चढाव हमें नया मार्ग दिखलाता है।* *हर जोखिम से ...14 वर्ष पहले
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"भइया अपने गाँव में" -- (बुन्देली काव्य-संग्रह) -- पं० बाबूलाल द्विवेदी - We're sorry, your browser doesn't support IFrames. You can still <a href="http://free.yudu.com/item/details/438003/-----------------------------------------...14 वर्ष पहले
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अब बक्श दे मैं मर मुकी - चरागों से जली शाम ऐ , मुझे न जला तू और भी, मेरा घर जला जला सा है,मेरा तन बदन न जला अभी, मैंने संजो रखे हैं बहुत से राख के ढेर दिल मैं कहीं, सुलग सुलग के आय...14 वर्ष पहले
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अपनी भाषाएँ - *जैसे लोग नहाते समय आमतौर पर कपड़े उतार देते हैं वैसे ही गुस्से में लोग अपने विवेक और तर्क बुद्धि को किनारे कर देते हैं। कुछ लोगों का तो गुस्सा ही तर्क...14 वर्ष पहले
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दरिन्दे - बारूद की गन्ध फैली है, माहौल है धुआँ-धुआँ कपड़ों के चीथड़े, माँस के लोथड़े फैले हैं यहाँ-वहाँ। ये छोटा चप्पल किसी मासूम का पड़ा है यहाँ ढूँढो शयद वह ज़िन...15 वर्ष पहले
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