एक सन्देश-

यह ब्लॉग समर्पित है साहित्य की अनुपम विधा "पद्य" को |
पद्य रस की रचनाओ का इस ब्लॉग में स्वागत है | साथ ही इस ब्लॉग में दुसरे रचनाकारों के ब्लॉग से भी रचनाएँ उनकी अनुमति से लेकर यहाँ प्रकाशित की जाएँगी |

सदस्यता को इच्छुक मित्र यहाँ संपर्क करें या फिर इस ब्लॉग में प्रकाशित करवाने हेतु मेल करें:-
kavyasansaar@gmail.com
pradip_kumar110@yahoo.com

इस ब्लॉग से जुड़े

शनिवार, 5 जून 2021

मजबूरी में नहीं रहेंगे

 लंबे जीवन की चाहत में ,ढंग से जीना छोड़ दिया है अपनी मनभाती चीजों से, अब हमने मुख मोड़ लिया है
 
 ना तो जोश बचा है तन में, और ना हिम्मत बची शेष है 
शिथिल हो रहे अंग अंग है, बदला बदला परिवेश है
 कई व्याधियों ने मिलकर के, घेर रखा है जाल बनाकर 
सुबह दोपहर और रात को, तंग हो गए भेषज खाकर 
पाबंदियां लगी इतनी पर, हम उनके पाबंद नहीं हैं 
वह सब खाने को मिलता जो ,हमको जरा पसंद नहीं है
 ना मनचाहा खाना पीना ,ना मनचाहे ढंग से जीना 
हे भगवान किसी को भी तू, ऐसे दिन दिखलाए कभी ना 
जीभ विचारी आफत मारी ,स्वाद से रिश्ता तोड़ लिया है 
लंबे जीने की चाहत में, ढंग से जीना छोड़ दिया है 

दिनदिन तन का क्षरण हो रहा बढ़ती जातीरोजमुसीबत 
फिर भी लंबा जीवन चाहे अजब आदमी की है फितरत 
आती जाती सांस रहे बस, क्या ये ही जीवन होता है
क्या मिलजाता क्यों येमानव इतनी सब मुश्किल ढोता है 
खुद को तड़पा तड़पा कर के, लंबी उम्र अगर पा जाते
 जीवित भले  कहो लेकिन वह, मरने के पहले मर जाते
 इसीलिए कर लिया है यह तय, मस्ती का जीवन जीना है 
जी भर कर के मौज मनाना ,मनचाहा खाना पीना है 
हमने जीवन नैया को अब  भगवान भरोसे छोड़ दिया है 
लंबे जीने की चाहत में, ढंग से जीना छोड़ दिया है

मदन मोहन बाहेती घोटू
अपनी-अपनी किस्मत 

हरएक कपड़े के टुकड़े की होती किस्मत जुदा-जुदा है 
जो भी लिखा भाग्य में होता, वो ही मिलता उसे सदा है

एक वस्त्र की चाहत थी यह,कि बनकर एक सुंदर चादर  
नयेविवाहित जोड़े की वो,बिछे मिलन की शयनसेज पर 
पर बदकिस्मत था ,अर्थी में, मुर्दे के संग आज बंधा है 
हरएक कपड़े के टुकड़े की होती किस्मत जुदा-जुदा है

 एक चाहता था साड़ी बन, लिपटे किसी षोडशी तन पर
 किंतु रह गया वह बेचारा ,एक रुमाल छोटा सा बनकर 
 जिससे कोई सुंदरी पोंछे,अपना पसीना यदा-कदा है
 हर एक कपड़े के टुकड़े की, होती किस्मत जुदा-जुदा है
 
 एक चाहे था बने कंचुकी ,लिपट रहे यौवन धन  के संग 
बना पोतडा एक बच्चे का,सिसक रहा,बदला उसका रंग
कोई खुश है किसी घाव पर ,पट्टी बंद कर आज बंधा है 
हर एक कपड़े के टुकड़े की होती किस्मत जुदा-जुदा है

मदन मोहन बाहेती घोटू

cheap whitehat monthly SEO Plans

Hi!

I`ve just checked your website and saw that it could really use a boost

if you ever should choose to consider a SEO strategy for your website,
kindly check our plans here
https://www.cheapseoagency.co/cheap-seo-packages/

thanks and regards
Cheap SEO Agency









https://www.cheapseoagency.co/unsubscribe/

शुक्रवार, 4 जून 2021

तुम जो भी हो जैसे भी हो मेरे लिए बहुत अच्छे हो 
तुम में नहीं बुराई कोई,तुम दिल के एकदम सच्चे हो 

 खुशनसीब मैं,क्योंकि पाया ,मैंने तुमसा जीवनसाथी
 मेरा और साथ तुम्हारा, जैसे हो हम दीया बाती 
 यही चाहती हूं मैं  हम तुम मिलकर के उजियारा लाएं जो भी अपना संगी साथी, उसका जीवन सुखी बनाएं यह है सच दुनियादारी में , वैसे तुम थोड़े कच्चे हो
 लेकिन तुम जो भी जैसे हो, मेरे लिए बहुत अच्छे हो 
 
 प्रभु ने अपना मेल कराया ,मुझे मिलाया, तुम्हें मिलाया यही प्रार्थना है अब प्रभु से, रहे प्रेम का हरदम साया 
 हम खुश रहे ,हमारे बच्चे,सुखी ओर खुशहाल रहे सब
जितने भी परिवारिक जन है सब में अच्छा प्यार रहे बस  तुम निर्मल निश्चल हो मन से, भोले से छोटे बच्चे हो
 तुम जो भी हो जैसे भी हो ,मेरे लिए बहुत अच्छे हो

तारा मदन मोहन बाहेती
आत्म निरीक्षण 

तुमने खुद कुछ गलती की है 
ठोकर तुमको तभी लगी है 
सड़क न देखी, दोष दूसरों ,
पर कि किसी ने गाली दी है 

 लोग न खुद की कमियां देखें 
 औरों पर आरोप लगाते 
  खुद को नहीं नाचना आता
  आंगन को टेढ़ा बतलाते 
   
यह मत समझो सभी गलत है,
 और तुम करते वही सही है 
 दोष कई हम में तुम में हैं ,
 धुला दूध का कोई नहीं है 
 
 ढूंढो मत बुराई औरों में ,
 कभी झांक देखो निज अंदर 
 तुम पाओगे कि बुराई का ,
 भरा हुआ है एक समंदर 
 
कभी कसौटी पर कर्मों की, 
परखो,खुद को, देखो घिस कर 
 जान पाओगे, खोट, खरापन
 अपना, नहीं लगेगा पल भर
  
क्योंकि गलती नहीं मानना ,
और सच को झुठला कर रखना 
कोशिश रहती कैसे भी बस,
अपनी खाल बचा कर रखना 
 
शुतुरमुर्ग से मुंह न छुपाओ ,
दुनिया है तुमको देख रही है
चिंतन करो ,मान लो गलती ,
मत बोलो, जो सही नहीं है

निकल जाएगा सर्प, लकीरें ,
सिर्फ पीटते रह जाओगे 
खुद को नहीं सुधारोगे तो ,
तुम जीवन भर पछताओगे

घोटू

हलचल अन्य ब्लोगों से 1-