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गुरुवार, 6 मार्च 2014

पीर विरह की


               पीर विरह की

जबसे मइके चली गयी तुम,छाये जीवन में सन्नाटे
सूनेपन और  तन्हाई में, लम्बी रातें  ,कैसे काटे

पहले भी करवट भरते थे ,अब भी सोते करवट भर भर
उस करवट और इस करवट में ,लेकिन बहुत बड़ा है अंतर
तब करवट हम भरते थे तो,हो जाती थी तुमसे टक्कर
तुम जाने या अनजाने में ,लेती मुझको बाहों में भर
पर अब  खुल्ला खुल्ला बिस्तर ,जितनी चाहो,भरो गुलाटें
दिन कैसे भी कट जाता है  ,लम्बी रातें  कैसे  काटें

ना तो रोज रोज फरमाइश,ना किचकिच ना झगडे ,अनबन
अब खामोशी पसर रही है ,तुम थी तो घर में था  जीवन
अब जब नींद उचट जाती तो,फिर मुंह ढक कर सो जाते है
विरह वेदना है कुछ दिन की,अपने मन को समझाते है
चुप्पी छाई शयनकक्ष में,न तो सांस स्वर,ना खर्राटे
बिस्तर में चुभते है कांटे ,लम्बी रातें ,कैसे काटे

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

बुधवार, 5 मार्च 2014

भगवान का धर्म प्रचार प्रोग्राम

  भगवान का  धर्म प्रचार प्रोग्राम

दुनिया में जब पापाचार बढ़ा ,
तो नरक में लोगों का रश बढ़ने लगा
स्वर्ग नरक की पॉपुलेशन का,
 बेलेन्स बिगड़ने लगा 
तो भगवान ने,नरक की पॉपुलेशन
पर  लगाने को लगाम
आरम्भ किया एक धर्म प्रचारक प्रोग्राम
हर मृतात्मा को ,ऊपर जाने पर,
स्वर्ग का कंडक्टेड टूर कराया जाये
ताकि स्वर्ग  की सुविधाओं को देख,
लोगों के मन में  धर्म की प्रेरणा आये
ऐसे कंडक्टेड टूर में  लोगों को बड़ा मजा आया
जब कई  धर्माचार्यों को अप्सराओं  संग ,
किलोलें करता हुआ पाया
स्वर्ग में जिधर देखो उधर मस्ती  थी छाई
और एक बड़े महात्मा के साथ ,
मर्लिन मनरो नाम की सुन्दरी  नज़र आयी
एक दर्शक ने पूछ लिया ,
क्या ये वो ही महात्मा जी है ,
जो जीवन भर थे ब्रह्मचारी ,
अब कर हे यहाँ मज़ा है
 गाइड बोला ,नहीं नहीं,ये तो अभी भी,
 ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे है,
 मार्लिन मनरो को ,उनके पास बिठाना
ये तो मर्लिन मनरो को, कर्मो की मिली सजा है
 
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

नेताओं का बुढ़ापा

         नेताओं का बुढ़ापा

स्वर्गलोक के देव, अप्सरायें न कभी बूढ़ी होती 
किन्तु बुढ़ापे  में मानव की,हालत बड़ी बुरी होती
हम लोग  रिटायर जब होते ,तो हो जाता है बुरा हाल
और नेता जब बूढ़े होते तो बन जाते है   राज्य पाल
क्या नेता होते देव तुल्य ,चिरयुवा ,जवां हरदम रहते
जो उनको चुन कर देव बनाते जीवन भर सब दुःख सहते

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

मंगलवार, 4 मार्च 2014

धन्यवादज्ञापन -महिला दिवस पर

   धन्यवादज्ञापन -महिला दिवस पर
 
जितनी भी महिलायें जीवन में आयी ,सबको करें याद
जिससे भी थोडा प्यार मिला ,उस हर महिला का धन्यवाद
                           माँ
जिसने नौ महीने  रखा कोख में ,पाला ,पोसा ,बड़ा किया
मेरे सुख ,दुःख का ख्याल रखा ,जिसके आँचल में दूध पिया
चलना सिखलाया ,थाम हाथ,जो ममता भरा हुआ सागर
उस जीवन दायिनी माता को ,शत शत प्रणाम ,मेरा सादर
                         बहने
हम साथ पले और बड़े हुए ,जिनके संग संग ,काटा बचपन
जिनकी राखी से बंध रहता ,जीवनभर प्यार भरा बंधन
भाई पर प्यार लुटाती जो ,उनकी निष्ठा के क्या कहने
है प्यार भरी और स्नेहशील ,मेरी प्यारी प्यारी बहने
                    पत्नी
जीवन के सूखे उपवन में ,वो आयी ,बहारें मुस्काई
एकाकीपन की पीर मिटी ,और सुधा प्रेम की सरसाई
जो स्वाति बूँद बन समा गयी ,इस ह्रदय सीप में मोती बन
वो पत्नी  जिसने प्यार दिया ,कर दिया सार्थक ये जीवन
                        बिटिया
मेरी बगिया में खिली कली ,मुस्काई,बड़ी हुई ,महकी
खुशियों से घर आबाद हुआ ,वो चंचल,चपल सदा चहकी
फिर हुई पराई वो बेटी ,खुश रहती है ,मुस्काती है
अब भी पापा की फ़िक्र जिसे ,जी भर कर प्यार लुटाती है
                    अन्य महिलायें
कितनी ही महिलायें आयी ,भाभी,चाची,दादी,नानी
कुछ सहपाठिन,कुछ सखी मित्र ,कुछ पडोसने ,कुछ अनजानी
जितनी भी महिलायें जीवन में आयी सबको करें याद
जिससे भी थोडा प्यार मिला ,उस हर महिला  का धन्यवाद

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

नज़रिया अपना अपना

         नज़रिया अपना अपना

हों कैसे भी हालत मगर ,कुछ लोग ढूंढ लेते खुशियां
 कुछ लोगों को हर सुख में ,भी आती  नज़र कई कमियां 
                                    नज़रिया अपना अपना
जैसे मरने पर हंसमुख जी को,चित्रगुप्त ने नरक दिया
तो गरम तेल में यमदूतों ने उन्हें पकड़ कर फेंक दिया
हंसमुख बोले जो पुण्य किया ,उसका भी थोडा  फल देते
थोडा सा बेसन मिल जाता ,तो गरम पकोड़े तल लेते
                                 नज़रिया अपना अपना
और दुखीराम को स्वर्ग मिला ,पहले तो थोडा हर्षाये
पर थोड़े दिन के बाद वही पहले से दुखी नज़र आये
बोले जो मिली अप्सरा है ,वो प्यार दिखाती है थोथा
पर अगर उर्वशी मिल जाती तो मज़ा और ही कुछ होता
                                  नज़रिया  अपना अपना

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

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