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मंगलवार, 14 अगस्त 2012

याद वो आता बहुत है जब दूर जाता है

याद वो आता बहुत है जब दूर जाता है

शराब कोई भी,कैसी भी,कहीं भी पीलो,
          हलक से उतरी तो पीकर  सरूर आता है
भले ही पायी हो,मेहनत से या दुआओं से,
              कामयाबी जो मिलती ,गरूर आता   है
भटकलो कितना ही तुम इधर उधर मुंह मारो,
              कभी ठहराव  ,कहीं पर  जरूर   आता है
इतने मगरूर  ना हो देख कर के आइना,
              जवानी में तो गधी पर  भी  नूर    आता है
बड़े बड़े गुनाह करके लोग  बच जाते,
               पकड़ में बेचारा ,एक बेक़सूर     आता है
उसके मिलने में गजब की कशिश सी होती है,
               जब भी वो पीके,नशे में हो चूर,   आता  है
किये अच्छे करम ,ता उम्र ,इसी हसरत में,
                करे जो नेकी ,वो जन्नत में  हूर  पाता  है
हमने देखें है होंश उनके सभी के उड़ते,
               जो भी दीदार  आपका  हजूर    पाता   है
 पास वो होता है तो उसकी कदर कम करते,
                याद वो आता बहुत है जब दूर    जाता है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

एक बार चख कर तो देखो

एक बार चख कर तो देखो

मेरे प्रियतम,

शादी के इतने सालों बाद,
कितने बदल गए हो तुम
अक्सर जताते हो कि,
करते हो मुझसे बहुत प्यार
पर आपकी सब बातें है बेकार
जब मेरी तारीफ़ करते हो,
तो कहते हो मै हूँ बड़ी स्वीट
और जब मै पास आती हूँ ,
तो कहते हो तुम्हे है  डाईबिटीज
और डाक्टर ने कहा है,
मीठी चीजों से परहेज रखो
पर डियर,एक बार प्रेम से तो चखो
तब तुम्हे हो जायेगा यकीन
कि  मीठी ही नहीं, मै हूँ बड़ी नमकीन
एक बार जो स्वाद पाओगे
बार बार खाना चाहोगे

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

पानी-तीन कवितायें

 पानी-तीन कवितायें

              १
           पानी का संगीत
पानी का एक अपना संगीत होता है
आसमान से बरसता है,तो रिमझिम करता है
नदिया में बहता है  तो कलकल   करता है
झरनों से झरता है तो झर झर करता  है
सागर की लहरों में,सर सर उछलता  है
वैसे तो शांतिप्रिय है,पर जब उफान पर आता है
तो तांडव नृत्य करता हुआ,
बाढ़,तूफ़ान और सुनामी लाता है
                    २
    पानी का स्वभाव
पानी जब जमीन पर रहता है
कल कल कर बहता है,
मधुर मधुर संगीत देता है
और जब थोडा ऊपर उठता है
श्वेत रजत सा बर्फ बना,
पहाड़ों पर चमकता है
और जब और भी ज्यादा ,
ऊँचा उठ जाता है
उसमे गरूर आ जाता,
काले काले बादल सा बन जाता है
कभी बिजली सा कड़कता है
कभी जोरों से गरजता है
कभी तरसाता है,कभी बरसता है
उसका रंग,रूप और स्वभाव,
ऊंचाई के साथ साथ,बदलता रहता है
पानी का और मानव का स्वभाव,
कितना मिलता जुलता है
क्योंकि मानव के शरीर में,
70 % से भी अधिक,पानी रहता है
             ३
    पानी और संगत का असर
धरा के संपर्क में पानी,
कल कल  करता रहता है
 मानव के संपर्क में आ वो पानी,
मल मूत्र  बन बहता है
समुन्दर के संपर्क में आकर,
खारा हो  जाता है
सूरज के संपर्क में आकर,
बादल बन जाता है
साथ मिला गर्मी का,
वाष्प  है बन जाता
और मिली सर्दी तो,
बर्फ बन  जम  जाता 
पानी वही पर जैसी होती है,
उसकी संगत या साथ
बदल जाता है उसका रंग रूप,
रहन सहन और स्वाद

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 

भविष्य का बोझ

भविष्य का बोझ

मै रोज सुबह सुबह देखता हूँ,

बच्चे जब स्कूल जाते हैं,
उन्हें बस तह छोड़ने के लिए ,
उनके माता या पिता,
उनके संग जाते है
और बस तक,
उनके भारी स्कूल बेग का बोझा ,
खुद उठाते है
बाद मे दिन भर  ये भारी बोझा,
अच्छों को खुद ही उठाना होता है
जिंदगानी के साथ भी,
एसा ही कुछ होता है
क्योंकि माँ बाप,एक हद तक,
जैसे स्कूल की बस तक,
तो बच्चों का बोझा उठा सकते है
पर  जिंदगानी के सफ़र मे,
हर एक को,
अपने अपने बोझे,
खुद ही उठाने पड़ते है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

सोमवार, 13 अगस्त 2012

कसक मन में रह गयी है

कसक मन में रह गयी है

भावनायें बह गयी,संभावनायें  ढह गयी है

मिलन फिर हो पायेगा, ये आस धूमिल रह गयी है
अब तो  कहने सुनने को बाकी बचा ही और क्या है,
ये तुम्हारी बेरुखी ही बात सारी कह गयी है
एक तो वातावरण में,हवाएं फैली,विषैली,
और उस पर फिर अचानक,हवा उलटी बह गयी है
कलकलाती थी नदी पर जब से पानी थम गया है,
हो गयी फिसलन यहाँ पर,काई  की  जम तह गयी है
आस में ,मौसम बसंती,आयेगा,पत्ते लगेंगे,
जिंदगानी एक सूखा वृक्ष बन कर रह गयी है
पता ना,किस दिन ढहेगी,पर टिकी,मजबूत है ,
ये पुरानी इमारत,भूचाल  इतने सह गयी है
क्यों हुआ,कैसे हुआ,क्यों कर हुआ,क्या बतायें,
मगर ये होना न था,ये कसक मन में रह गयी है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

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