गुस्सा या शृंगार
(घोटू के छक्के )
पत्नी अपनी थी तनी,उसे मनाने यार
हमने उनसे कह दिया,गलती से एक बार
गलती से एक बार,लगे है हमको प्यारा
गुस्से में दूना निखरे है रूप तुम्हारा
कह तो दिया,मगर अब घोटू कवी रोवे है
बात बात पर वो जालिम गुस्सा होवे है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
805. वृद्ध का दुःख (10 हाइकु)
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वृद्ध का दुःख
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1.
वृद्ध की आस
कोई तो हो पास
बाँटें वे दुःख।
2.
वृद्ध का दुःख
मन में समाहित
सोचके हित।
3.
वृद्ध का कोना
रिश्तों की राह ताके
रहता सून...
12 घंटे पहले

