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शनिवार, 20 सितंबर 2025

जय जय लक्ष्मी माता 

जय जय श्री लक्ष्मी माता 
तू सुख और संपति दाता 
तेरी कृपा दृष्टि जो पाता 
हरदम तुझको शीश नमाता 
थोड़ा मुझ पे भी लुटा दे प्यार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 
तू भर दे मेरा भंडार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 

तेरी छवि है धन बरसाती 
जल स्नान कराते हाथी 
कमल पुष्प पर तेरा आसन 
हाथ जोड़कर खड़े भक्तजन 
तेरी पूजा करें संसार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 
तू भर दे मेरे भंडार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 

माता तू है धन प्रदायिनी 
नारायण की अंकशायनी 
शेषनाग पर ,बीच समंदर 
रहती पति सेवा मे तत्पर 
तुझ में सेवा भाव अपार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 
तू कर दे मेरा भी उद्धार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 

आया शरण तिहारी माते 
मुझ पर कृपा दृष्टि बरसा दे 
मेरे भाग्य को तू चमका दे 
मेरा वैभव खूब बढ़ा दे 
मेरा बेड़ा लगा दे पार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 
तेरी महिमा अपरंपार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 

मैया तू है देवी धन की 
तुझ बिन गति नहीं जीवन की 
 तू है , सुंदर परिधान है
तू है, अच्छा खानपान है
तुझे पूजूं में बारंबार 
ओ मैया लक्ष्मी जी 
कर दे मुझ पर भी उपकार 
ओ मैया लक्ष्मी जी

मदन मोहन बाहेती घोटू 

शनिवार, 13 सितंबर 2025

कीर्तन ,माता रानी का


नवरात्रि के नव रूपों में,

 भव्य तेरा श्रृंगार 

अपने भक्तजनों पर माता,

सदा लुटाती प्यार 

तेरी महिमा सब ने जानी 

मेरी माता रानी 

मुझ पर कर दे मेहरबानी

 मेरी माता रानी


  जपूं में नाम तेरा दिन रात 

  चाहिए तेरा आशीर्वाद 

  मुझे दे चरण चढ़ा परसाद 

   हमेशा  सर पर रखना हाथ

 मेरे मन में बसी हुई है

 तेरी छवि सुहानी

 मुझ पर कर दे मेहरबानी

 मेरी माता रानी 


तुझको चुनर मै चढ़ाऊ

 तुझको टीका मैं लगाऊं 

तुझे माला मैं पहनाऊं 

तुझपर परसाद चढ़ाऊ 

तेरी आरती उतारू 

अपना सब कुछ तुझ पर वारूँ 

तेरी महिमा जानी मानी

 मेरी माता रानी 

कर दे मुझ पर मेहरबानी 

मेरी माता रानी 


तेरी भक्ति की शक्ति का 

कैसे करूं बखान 

जी करता है माता गाउं 

सदा तेरा  गुणगान 

तेरी शक्ति है निराली 

तू है दुर्गा तू है काली 

देवी तू है खप्पर वाली 

तू ही वैष्णो देवी प्यारी  

भक्त निकलते हैं घर घर से 

तेरे दर्शन को हैं तरसते 

तेरी कृपा दृष्टि है पानी 

मेरी माता रानी 

कर दे सब पे मेहरबानी 

मेरी माता रानी


माता तू सुख शांति दात्री 

तुझको पूजूं मै नवरात्रि 

अपने घर में, कलश धरूं मैं 

पूरे नौ दिन, वरत करूं मैं

श्रद्धा और आस्था भर के 

नौ कन्या का पूजन कर के 

गाउं आरती सुहानी 

मेरी माता रानी 

कर दे सब पर मेहरबानी 

मेरी माता रानी 


मदन मोहन बाहेती घोटू

बुधवार, 10 सितंबर 2025

श्राद्ध मनाओ 

जिन पूर्वज पुरखों के कारण पाया यह जीवन है 
जिनके कारण रक्त प्रभावित रग रग में हर क्षण है 
जिनके संचित सत्कर्मों का हम है लाभ उठाते 
उनके पावन श्री चरणों में श्रद्धा सुमन चढ़ाते 
तुम श्रद्धा से श्राद्ध पक्ष में उन्हें नमाओ शीश 
तृप्ति मिलेगी उन्हें स्वर्ग में ,देंगे वह आशीष 
उनकी मरण तिथि अवसर पर ब्राह्मण भोज कराओ 
श्रद्धा से दे दान दक्षिणा, ढेरों पुण्य कमाओ 
नाम तुम्हारे के पीछे है अब भी जिनका नाम 
अपने सभी दिवंगत पुरखों को तुम करो प्रणाम

मदन मोहन बाहेती घोटू 
हमारा श्राद्ध 

एक दिन बाद 
बहू को आया याद 
अरे कल तो था ससुर जी का श्राद्ध 
बहू ने झट से मोबाइल उठाया 
डोमिनो को फोन कर 
एक पिज़्ज़ा पंडित जी के घर भिजवाया 
ब्राह्मण भोजन का यह उसका नया स्टाइल था 
दक्षिणा के नाम पर कोक मोबाइल था 
रात ससुर जी सपने में आए 
मुस्कराए 
और बोले बहू धन्यवाद 
इतने दिनों बाद 
कर लिया हमें याद 
तुम्हारा भिजवाया गया पिज़्ज़ा था बहुत स्वाद 
ऐसे पहले भी तुम पिज़्ज़ा मंगवाती थी 
पर अपने कमरे में अपने पति के साथ ही खाती थी 
कभी कभार एक टुकड़ा मुझे भी भिजवाती थी 
पर अब की बार तो पिज़्ज़ा पूरा था 
चीज से भरा था 
मैंने प्रेम से खाया 
साथ में उर्वशी और रंभा को भी खिलाया 
उन्हें भी बहुत पसंद आया 
बहू बोली आप स्वर्ग में भी मजा कर रहे हैं 
और हम यहां महंगाई से मर रहे हैं
अब तो आपकी पेंशन का पैसा भी नहीं आता है 
घर का बजट मुश्किल से चल पाता है 
आपको पता है आजकल पिज़्ज़ा भी छह सौ रुपए में आता है 
हमने कहा हम स्वर्ग में है पर धरती की सभी खबरों का पता है
आजकल पिज़्ज़ा के साथ नई स्कीम चल रही है और कोक फ्री में मिलता है

मदन मोहन बाहेती घोटू 

शनिवार, 6 सितंबर 2025

मैं बूढ़ा नहीं हूं 

काम की हूं चीज मैं कूड़ा नहीं हूं 
बूढ़ा दिखता हूं मगर बूढ़ा नहीं हूं 

कोई मेरे दिल के अंदर झांक देखें 
मेरे मन की भावना को आंक देखें
पाएगा वह एक कलेजा जलता जलता जवानी का जूस है जिसमें उबलता 
वीक थोड़ी बैटरी पर हो गई है 
चेहरे की चमक थोड़ी खो गई है परिस्थितियों हो गई प्रतिकूल सी है 
मगर खुशबू अब भी कायम फूल सी है उमर बढ़ती ने मुझे ऐसा ठगा है 
फूल सा ये बदन मुरझाने लगा है 
मगर चेहरा मेरा अब भी मुस्कुराता 
अब भी हंसता हूं खुशी के गीत गाता देख करके हुस्न मन अब भी उछलता 
अभी भी कायम पहले जेसी ही चंचलता कड़कते व्यवहार में आई नमी है 
बस जरा सी कहीं, कुछ आई कमी है 
 तन बदन पर आ गई कुछ सलवटें है
 उड़ न पाते अधिक,क्योंकि पर कटे हैं जवानी का जोश थोड़ा हो गया कम
मगर जज्बा पुराना अब भी है कायम
 ढोल में है पोल फिर भी बज रहा है 
रंगीला मिज़ाज फिर भी सज रहा है 
ठीक से नव पीढ़ी संग जुड़ा नहीं हूं 
बूढ़ा दिखता हूं मगर बूढ़ा नहीं हूं 

मदन मोहन बाहेती घोटू 

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