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शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013

कसक

जिन्दगी तेरा गुजारा
तब बड़ा मुश्किल न था
तेरे राहो में किसी के
यादो का रहबर न था
जब तलक नशा उनकी
बातो का छाया न था
याद में उनके तडप कर
ये मजा आया न था
जिन्दगी तेरा गुजारा
तब बड़ा मुश्किल न था
तेरे रातो में किसी के
खाब का रहबर न था
प्यार सब करते खुदा से
दीदार पर मुमकिन नहीं
छोड़ दे जो शक करे वो
दिल मेरा काफिर न था
मेरे इश्क के अश्क उनके
आँख में टिकते अगर
दौड़ के मिलते गले वो
मै बुरा कातिल न था
जिंदगी तेरा गुजारा तब
बड़ा मुश्किल न था
तेरी राहो में किसी के
इश्क का रहबर न था ...............अमित
 

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2013

समझोता या समर्पण

          समझोता या समर्पण

समझे थे सिंह दहाड़ेंगा ,रह गया मगर म्याऊं कर के
हो रिंग मास्टर से जलील,फिर भी उसकी'हाँ'हूँ'कर के
शायद उसकी मजबूरी थी ,या फिर था प्रेम पिंजरे से ,
या फिर वो उसको फंसा न दे,बोला'मै क्यों जांऊ',डर के

घोटू 

बेहतर है चुप ही रह जाना

उनको कुछ कहने सुनने से .
बेहतर है चुप ही रह जाना ..
जिसको अपना मान चुके हम.
अपनापन क्या है दिखलाना.
हम जाने वो दिल में रहते
दुनिया को क्या है बतलाना
वो समझे ना समझे हमको
बेहतर है चुप ही रह जाना
छुप छुप अश्क पिए दिल ने
अब और नहीं है पास खजाना
उनको कुछ कहने सुनने से
बेहतर है चुप ही रह जाना
दिल में प्रीत अगर इतनी फिर
झूठ मुठ क्यों दोस्त बनाना
वो हमसे जो रुठ  गये  तब
बेहतर है अपना मर जाना
उनको कुछ कहने सुनने से
बेहतर है चुप ही रह जाना
अलग मड़ईया डाल शिखर पर
उनका नाम सदा गोहराना
उनके कुछ कहने सुनने से
बेहतर है चुप ही रह जाना
हम अपना जीवन जी लेंगे
गम तुम उनके पास न जाना
उनको कुछ कहने सुनने से
बेहतर है चुप ही रह जाना  ................अमित




बुधवार, 2 अक्टूबर 2013

कायापलट

        कायापलट

 आपने मुझको है ये क्या  कर दिया
गेंहूं था मै ,पीस   आटा  कर दिया
इस तरह ,कायापलट ,मेरी  करी ,
घी लगा ,सेका ,परांठा  कर दिया
बांह में एसा समेटा ,आपने ,
समोसे में जैसे  आलू भर दिया
प्यार में अपने डुबाया इस तरह,
रस से रसगुल्ला बना कर भर दिया
मै सडा ,मैदा पड़ा ,उफना हुआ,
टेडा मेडा आपने  जब तल दिया
डुबा कर के चाशनी में प्यार में,
 रस भरे प्यारी जलेबी कर दिया
मै तो सूखी घास का तृण मात्र था,
आपने था प्यार से जब चर लिया
अपने तन में इस तरह से समाया,
दूध सा प्यारा ,सुहाना  कर दिया
गर्ज ये है  ,जो भी था मै ,आपने,
मुझको अपने मन मुताबिक़  गढ़ लिया
काबिले तारीफ़ हरेक अंदाज से,
स्वाद ले लेकर मज़ा पूरा लिया

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

गांधी जयन्ती पर

       गांधी जयन्ती पर
                    १
   गांधीजी ,रह गए ,
   फोटो बन,टंग कर
   या फिर है दिल्ली में,
   वे दस जनपथ पर
                   २
   नाम पर सड़कें है,
   मौन सी  पड़ी
   चलती ही रहती है,
    गड्ढों  से  भरी
                ३
     गांधी के नाम की,
     आज भी है आंधी
      बड़े बड़े नोटों पर,
       गांधी  ही गांधी  
 
घोटू

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