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बुधवार, 14 नवंबर 2012

सोनू - मोनू - पिंकू - गुड्डू, आओ मनाएं बाल दिवस....






















बाल दिवस है बाल दिवस
    हम सबका है बाल दिवस,
             सोनू - मोनू - पिंकू - गुड्डू
                    आओ मनाएं बाल दिवस....
कागज़ की एक नाव बनाएं
    तितली रानी को बैठाएं,
         नदी किनारे संग संग उसके
                आओ हम सब चलते जाएँ....
तितली उड़े आकाश में
   भगवान जी के पास में,
       भगवान जी से लाये मिठाई
           खा करके चलो करें पढ़ाई....
पढ़ना है जी जान से
    ताकि हिन्दुस्तान में,
          खूब बड़ा हो अपना नाम
               खूब अच्छा हो अपना काम....
काम से पापा मम्मी खुश
      काम से सारे टीचर खुश,
           सारे खुश हो खुशी मनाएं
                 बड़े भी सब बच्चे हो जाएँ.....
बच्चों का हो ये संसार
     बचपन की हो जय जयकार,
          ना चालाकी - ना मक्कारी
                  ना ही कोई दुनियादारी.......
दुनिया पूरी हो बच्चों की
    केवल हो सीधे - सच्चों की,
         सच्चे दिल की ये आवाज
              आओ धूम मचाएं आज.....

               - VISHAAL CHARCHCHIT

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

बाबू जी की दीवाली........















  और सुनाएं बाबू जी
       दीवाली मना रहे हैं?!
           सबकुछ नया - नया और
               हाई टेक बना रहे हैं?!.....
  देसी दीये पुराने लगते
      चाइनीज झालर लाये हैं,
          लक्ष्मी गणेश की मूर्ति भी
              चाइना से ही मंगवाए हैं....
  देश हमारा बड़ा हो रहा
      पता आपसे चलता है,
           क्योंकि हर साल दीवाली पर
                बजट आपका बढ़ता है.....
  पटाखे कई हजार के
       इस बार भी लाये हैं न?!
             पूरा मोहल्ला हिलाने का
                   इस बार भी कार्यक्रम बनाए हैं न ?!
  अच्छा, एक राज की बात
       क्या आप मुझे बताएँगे?
             कितना सोना - कितना रुपया
                   इस बार लक्ष्मी जी को चढ़ाएंगे?
  सच कहें तो आपको देख कर
       बाबू जी हम खुश हो लेते हैं,
            और आपकी दीवाली को ही हम
                  अपनी दीवाली समझ लेते हैं.....
  वर्ना हम गरीब क्या जानें
         कि दीवाली क्या होती है,
                रोटी - दाल - दीये के अलावा
                        खुशहाली क्या होती है....
  लक्ष्मी जी को प्रसन्न कर सकें
       अपनी इतनी औकात कहाँ,
             आपकी तरह सोना - रुपया
                    और महंगे प्रसाद कहाँ....
  महंगाई ने हिला दिया है
      रोम - रोम तक बाबू जी,
            जाने कब तक और बचेंगे
                  हम गरीब अब बाबू जी....

                        - VISHAAL CHARCHCHIT

संरक्षक (रेफ्रिजेटर)

     संरक्षक (रेफ्रिजेटर)

कई रसीली ,मधुर रूपसी,
मेरे उर में  आती जाती
उनकी  सुरभि,मुझे लुभाती
निश्चित ही स्वादिष्ट बहुत वो होगी,
मेरा मन ललचाता
लेकिन मै कुछ कर ना पाता
क्योंकि मुझे गढ़ने वाले ने ,
मेरे मुख दांत  ना दिये
सिर्फ सूँघना ही नसीब में लिखा इसलिये
मै तो उनके रूप ,स्वाद को कर संरक्षित
उनकी जीवन अवधि बढाता रहता,परहित
यूं ही तरस तरस कर करना जीवन व्यापन
बिना किये रस का आस्वादन ,
कट जाता है ,मेरा जीवन
कई मिठाई,कितने ही फल
कितने ही पकवान,पेय जल
आकर्षित करते रहते है मुझको हर पल 
मेरा मन कितना ही चाहे
मै बेबस ,भरता ही रहता,ठंडी आहें
मन मसोस मै रहता हरदम
तुम चाहो तो इसको कह सकते  हो संयम
बचा खुचा ,घर का सब खाना
है मेरे ही हिस्से आना
मुझे चाहता दिल से गोरस
मै ना अगर मिलूँ,
तो उसका दिल जाता फट
मै संरक्षक ,
जो भी मेरे उर में बसता,
उसका यौवन,संरक्षित रहता है,
एक लम्बी अवधी तक
मै तो हूँ घर घर का वासी ,
सभी गृहणियों का मै प्यारा
मै  रेफ्रिजेटर  तुम्हारा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

सोमवार, 12 नवंबर 2012

आज दीवाली आई भाई


जहाँ को जगमग करते जाओ,
खुशियों की सौगात है आई;
दीपों की आवली सजाओ,
आज दीवाली आई भाई ।

श्री कृष्ण ने सत्यभामा संग नरकासुर संहार किया,
सोलह हज़ार स्त्रियों के संग इस धरा का भी उद्धार किया ।

असुर प्रवृति के दमन का
उत्सव आज मनाओ भाई;
दीपों की आवली सजाओ,
आज दीवाली आई भाई ।

रक्तबीज के कृत्य से जब तीनो लोकों में त्रास हुआ,
माँ काली तब हुई अवतरित, दुष्ट का फिर  तब नाश हुआ ।

शक्ति स्वरुपा माँ काली व,
माँ लक्ष्मी को पूजो भाई;
दीपों की आवली सजाओ,
आज दीवाली आई भाई ।

लंका विजय, रावण मर्दन कर लखन, सिया संग राम जी आये,
अवध का घर-घर हुआ तब रोशन, सबके मन आनंद थे छाये ।

उस त्योहार में हो सम्मिलित,
बांटों, खाओ खूब मिठाई;
दीपों की आवली सजाओ,
आज दीवाली आई भाई ।

पवन तनय का आज जनम दिन, कष्ट हरने धरा पर आये,
सेवक हैं वो राम के लेकिन, सबका कष्ट वो दूर भगाए ।

नरक चतुर्दशी, यम पूजा भी,
सब त्यौहार मनाओ भाई,
दीपों की आवली सजाओ,
आज दीवाली आई भाई ।

मर्यादित हो और सुरक्षित, दीवाली खुशियों का बहाना,
दूर पटाखों से रहना है, बस प्रकाश से पर्व मनाना ।

अपने साथ धरती भी बचाओ,
प्रदुषण को रोको भाई;
दीपों की आवली सजाओ,
आज दीवाली आई भाई ।

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