बहुत तुम जुल्म ढाती हो
जो बोसा लूं,चुभे खंजर,
लूं चुम्बन काट खाती हो
जो मै लूं हाथ हाथों में,
मुझे नाख़ून चुभाती हो
जो फेरूँ हाथ जुल्फों पर ,
तो हेयरपिन मुझे चुभते,
बहुत तुम जुल्म ढाती हो,
जब मेरे पास आती हो
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
अनुकम्पा नियुक्ति सदैव स्थायी-इलाहाबाद हाईकोर्ट
-
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक
आश्रित कोटे (अनुकम्पा नियुक्ति) के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरी हमेशा स्थायी
औ...
4 दिन पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।